राजस्थान चुनाव: मिशन 156 पर कांग्रेस! जानें क्या रहा है प्रदेश का चुनावी समीकरण
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 31 Mar 2023 7:09 PM
Jaipur: Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot and AICC General Secretary Ajay Maken arrive to attend a meeting of Congress, at party office in Jaipur, Saturday, Sept. 17, 2022. (PTI Photo)(PTI09_17_2022_000165A)
Rajasthan Election 2023 : राजस्थान कांग्रेस के अंदर जो कलह चल रही है वो किसी से छिपी नहीं है. साल 2018 में जब से अशोक गहलोत ने सत्ता संभाली है, सचिन पायलट गुट के साथ उनके रिश्तों में खटास जारी है. सीएम अशोक गहलोत ने जानें क्या कहा है कांग्रेस की जीत को लेकर
Rajasthan Election 2023 : इस साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. इस बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में एक बार फिर कांग्रेस सरकार बनने का भरोसा जताते हुए कहा है कि इस बार वह ‘मिशन 156’ लेकर चल रहे हैं. राजस्थान में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन क्या कांग्रेस यहां लगातार दुबारा सरकार बना पाएगी? यह पूछे जाने पर गहलोत ने भरतपुर में मीडिया से कहा कि इस बार तो मिशन 156 (सीट) … पहली बार जब मैं मुख्यमंत्री बना तो हम 156 सीट जीतकर आए थे, इस बार भी मैं मिशन-156 की बात कर रहा हूं. अपनी सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं व बजट की ओर इशारा करते हुए गहलोत ने विश्वास जताया कि मतदाता एक बार फिर कांग्रेस को मौका देंगे.
राजस्थान कांग्रेस के अंदर जो कलह चल रही है वो किसी से छिपी नहीं है. साल 2018 में जब से अशोक गहलोत ने सत्ता संभाली है, सचिन पायलट गुट के साथ उनके रिश्तों में खटास जारी है. यदि आपको याद हो तो पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत का नाम उछला था तो उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पद छोड़ने की स्थिति में सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की संभावना थी, जो अशोक गहलोत को इच्छा के विपरीत थी. यही नहीं अशोक गहलोत और सचिन पायलट पार्टी फोरम के अलावा सार्वजनिक रूप से भी एक-दूसरे पर छींटाकशी करते नजर आ चुके हैं.
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हालांकि संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो अशोक गहलोत की स्थिति बहुत मजबूत हैं, लेकिन सरकार के प्रति असंतोष जताने वाले विधायकों की संख्या भी कम नहीं है. अब देखना है कि राजस्थान में चुनाव के बाद परिणाम क्या आते हैं ? कांग्रेस के बीच अंदरूनी कलह के कारण कांग्रेस का सत्ता में वापसी का रास्ता आसान नहीं रहेगा. इसके अलावा प्रदेश के इतिहास पर नजर डालें तो यहां जनता ने हर 5 साल में सत्ता में बदलाव किया है. राजस्थान में 1993 के बाद से हर पांच साल पर प्रदेश की सरकार बदलती रही है. यहां खास बात ये हैं कि सत्ता की यह अदला-बदली सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच होती रही है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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