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Railway: बिहार को तीन अमृत भारत और चार पैसेंजर ट्रेन की मिली सौगात

Updated at : 29 Sep 2025 5:19 PM (IST)
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Railway: बिहार को तीन अमृत भारत और चार पैसेंजर ट्रेन की मिली सौगात

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बिहार में जिस तेज गति से विकास हो रहा है, उससे आने वाले समय में राज्य स्वर्ण राज्य के तौर पर उभरेगा. वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने राज्यों में रेलवे को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया. वर्ष 2014 से पहले बिहार के लिए सालाना रेलवे बजट एक हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये हो गया है. राज्य का पूरे रेल नेटवर्क का बिजलीकरण हाे चुका है और 1899 किलोमीटर नया रेल ट्रैक बिछाया गया है. पहली बार देश के नॉन-एसी कोच में आधुनिक तकनीक का प्रयोग अमृत भारत ट्रेन में किया गया है.

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Railway: बिहार को दिवाली से पहले रेल मंत्रालय की ओर से बड़ी सौगात मिली है. सोमवार को बिहार सात नयी ट्रेन की सौगात मिली. इसमें तीन अमृत भारत एक्सप्रेस और चार पैसेंजर ट्रेन है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ कर इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखायी. नये ट्रेन से संचालन से बिहार में कनेक्टिवटी बेहतर होगी. तीन नये अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू होने से देश में 30 अमृत भारत ट्रेन की सेवा शुरू होगी. जिसमें 26 ट्रेन सेवा की सुविधा बिहार को मिली है. मुजफ्फरपुर–चारलापल्ली–मुजफ्फरपुर अमृत भारत एक्सप्रेस के शुरू होने से दक्षिण भारत के लिए मुजफ्फरपुर के बीच पहली अमृत भारत ट्रेन चलेगी. जबकि छपरा-आनंद विहार के बीच चलने वाली अमृत भारत ट्रेन के संचालन के बाद बिहार-दिल्ली के बीच अमृत भारत ट्रेन की संख्या 6 हो गयी है.

इसके अलावा दरभंगा-अजमेर के बीच अमृत भारत ट्रेन शुरू की गयी है. आधुनिक सुविधा से लैस स्वदेशी अमृत भारत ट्रेन से यात्रियों के तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा. इन ट्रेनों के संचालन से देश के अन्य हिस्सों बिहार की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी. साथ ही राज्य में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बिहार में जिस तेज गति से विकास हो रहा है, उससे आने वाले समय में राज्य स्वर्ण राज्य के तौर पर उभरेगा. वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने राज्यों में रेलवे को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया.

वर्ष 2014 से पहले बिहार के लिए सालाना रेलवे बजट एक हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये हो गया है. राज्य का पूरे रेल नेटवर्क का बिजलीकरण हाे चुका है और 1899 किलोमीटर नया रेल ट्रैक बिछाया गया है. पहली बार देश के नॉन-एसी कोच में आधुनिक तकनीक का प्रयोग अमृत भारत ट्रेन में किया गया है. 

वर्ष 2014 के बाद बिहार में पूरे हुए रेलवे प्रोजेक्ट

रेल मंत्रालय के अनुसार बिहार में वर्ष 2014 के बाद पटना में रेल-रोड पुल, मुंगेर रेल-रोड पुल, कोसी पुल, दनियावां-बिहारशरीफ नयी लाइन, चांदन-बांका नयी लाइन, रामपुरहाट-मंदारहिल नयी लाइन, महाराजगंज-मशरख नयी लाइन, राजगीर-तिलैया-नटेसर-इस्लामपुर नयी लाइन, मानसी-सहरसा-पूर्णिया के बीच बड़ी लाइन, जयनगर-नरकटियागंज के बीच बड़ी लाइन, कप्तानगंज-छपरा के बीच बड़ी लाइन, सकरी-निर्मली और सहरसा-फारबिसगंज के बीच बड़ी लाइन, मानसी-सहरसा-सहरसा-पूर्णिया के बीच बड़ी लाइन, साहिबगंज-पीरपैंती के बीच दोहरीकरण, पीरपैंती-भागलपुर के बीच दोहरीकरण सहित 21 प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है और इसे सेवा के लिए शुरू किया जा चुका है.

साथ ही अररिया-गलगलिया के बीच नयी लाइन का काम पूरा हो चुका है और जल्द ही इसका उद्घाटन होगा. रेलवे का कहना है कि बिहार में सकरी-हसनपुर, खगड़िया-कुश्शेवसर स्थान, कुरसेला-बिहारीगंज, तिलैया-कोडरमा, हाजीपुर-सुगौली, सीतामढ़ी-शिवहर, छपरा-मुजफ्फरपुर, अररिया-सुपौल, विक्रमशिला-कटेरिया जैसे कई क्षेत्र में नयी रेल लाइन योजना पर काम चल रहा है. साथ ही कई रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण और तीसरी और चौथी लाइन बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है. 


भूटान और भारत के बीच आने वाले समय में होगा रेल नेटवर्क 

भारत और भूटान के बीच काफी अच्छे संबंध है. इस संबंध को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को 4033 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. इस रेल प्रोजेक्ट से दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ने के साथ ही व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. अभी तक पश्चिम बंगाल में हासीमारा तक ट्रेन थी, अब यह सीधे भूटान के गालेफू तक चल सकेगी. असम के कोकराझार से भूटान के गालेफू तक रेल लाइन बिछाने को मंजूरी मिली है. लगभग 69 किलोमीटर लंबे इस लाइन के निर्माण पर लगभग 3456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. दूसरा प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल के बनरहाट से भूटान के समत्से को जोड़ने का काम करेगा.

लगभग 20 किलोमीटर लंबे इस रेल नेटवर्क के निर्माण पर 577 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत और भूटान के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और व्यापारिक साझेदार है. रेल कनेक्टिविटी संबंध के साथ व्यापार बढ़ाने में भी मददगार होगा.  भूटान के समत्से और गालेफू बड़े आयात-निर्यात केंद्र हैं और यह भारत-भूटान की लगभग 700 किलोमीटर लंबी सीमा को जोड़ते हैं. भूटान में बनने वाला पहला रेल प्रोजेक्ट है, जो भारत से सीधे जुड़ेगा. 

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Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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