Pharma: भारत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का बन रहा है वैश्विक हब

Published by : Vinay Tiwari Updated At : 09 Oct 2024 6:07 PM

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पहले दवा निर्माण के एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट(एपीआई) के लिए विदेश पर अधिक निर्भरता थी. लेकिन सरकार के प्रयासों के कारण अब भारत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवा का वैश्विक स्तर पर हब बनता जा रहा है. मौजूदा समय में फार्मास्यूटिकल उत्पादन में भारत दुनिया में तीसरे और कीमत के मामले में 14वें स्थान पर है.

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Pharma: मेक इन इंडिया पहल के कारण देश में दवा निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री पर दूसरे देशों की निर्भरता कम हो रही है. पहले दवा निर्माण के एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट(एपीआई) के लिए विदेश पर अधिक निर्भरता थी. लेकिन सरकार के प्रयासों के कारण अब भारत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवा का वैश्विक स्तर पर हब बनता जा रहा है. मौजूदा समय में फार्मास्यूटिकल उत्पादन में भारत दुनिया में तीसरे और कीमत के मामले में 14वें स्थान पर है. यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने 6ठे सीआईआई एंड लाइफ साइंस समिट 2024 में कही.

उन्होंने कहा कि देश को फार्मास्यूटिकल और बायोटेक के क्षेत्र में वैश्विक हब के तौर पर विकसित करने के लिए उद्योग, सरकारी अधिकारी और शैक्षणिक जगत को मिलकर काम करना होगा. आने वाले समय में औद्योगिक क्रांति बायोटेक क्षेत्र में आयेगी. देश में दवा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड योजना लेकर आयी और साथ ही कई कदम उठाए गये. उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक भारत बायोफार्मास्यूटिकल और बायो-मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन जायेगा. 


दवा की गुणवत्ता हो रही है बेहतर

दुनिया में खायी जाने वाले हर तीसरी दवा मेड इन इंडिया है. इससे जाहिर होता है कि दवा की गुणवत्ता बेहतर हुई है. हाल में आये सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन(सीडीएससीओ) के सर्वे से इसकी पुष्टि होती है. सर्वे में सभी राज्यों से 48 हजार दवा के सैंपल की जांच की गयी और सिर्फ 0.02 फीसदी में मिलावट पायी गयी. हालांकि दवा विभिन्न मौसम वाले क्षेत्रों में भेजी जाती है. ऐसे में दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है ताकि दवा की गुणवत्ता बरकरार रह सके. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की धमक बढ़ रही है. दुनिया में कोरोना का पहला डीएनए वैक्सीन भारत ने विकसित किया और पहला ह्यूमन पैपीलोमा वायरस(एचपीवी) का विकास किया जा रहा है.

इस वैक्सीन से लड़कियों में सर्विकल कैंसर रोकने में मदद मिलेगी. दुनिया की 65 फीसदी वैक्सीन का निर्माण भारत करता है. कम और मध्यम आय वाले देशों के लिए भारत की दवाओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में देश की बायो इकोनॉमी 13 गुणा बढ़ी है और 6 हजार बायो स्टार्टअप काम कर रहे हैं. देश में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन शुरू किया गया है और आने वाले पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. 

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