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आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को होगी फांसी, जल्लाद ने बतायी अहम बात

Updated at : 18 Feb 2021 4:55 PM (IST)
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आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को होगी फांसी, जल्लाद ने बतायी अहम बात

पवन जल्लाद मौके की जगह का भ्रमण कर सारी जानकारियां दे चुके हैं. बक्सर से फांसी के लिए रस्सी मंगवाई जा रही है. पवन जल्लाद दो बार फांसीघर का निरिक्षण कर चुका है, तख्ता-लीवर में कमी थी जिसे दूर कर दिया गया है. पवन जल्लाद पिछले साल के शुरू में तब खासी चर्चाओं में आए थे, जब निर्भया केस में चारों गुनहगारों को एक साथ दिल्ली की जेल में फांसी की सजा दी गई.

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  • आजादी के बाद किसी महिला को फांसी होने जा रही है.

  • बक्सर से फांसी के लिए रस्सी मंगवाई जा रही है

  • जल्लाद भी बनायेगा रिकार्ड

देश में पहली बार आजादी के बाद किसी महिला को फांसी होने जा रही है. अगर इस पर रोक नहीं लगी तो फांसी देने वाले जल्लाद के नाम यह रिकार्ड आ जायेगा. मथुरा जेल में फांसी की तैयारियां शुरू हो चुकी है.

पवन जल्लाद मौके की जगह का भ्रमण कर सारी जानकारियां दे चुके हैं. बक्सर से फांसी के लिए रस्सी मंगवाई जा रही है. पवन जल्लाद दो बार फांसीघर का निरिक्षण कर चुका है, तख्ता-लीवर में कमी थी जिसे दूर कर दिया गया है. पवन जल्लाद पिछले साल के शुरू में तब खासी चर्चाओं में आए थे, जब निर्भया केस में चारों गुनहगारों को एक साथ दिल्ली की जेल में फांसी की सजा दी गई.

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इस तरह के मौके में जल्लाद का काम करने वाले पवन साधारण दिनों में कपड़े बेचने का काम करते हैं. भारत में भी अब बहुत काम बच्चे हैं जो यह काम करते हैं. पवन की उम्र 57 साल है. इस काम को वह पेशे के तौर पर देखते हैं.

अगर न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला दिया है, तो सजा पाने वाले ने ऐसा काम किया है हम केवल अपने पेशे से इमानदारी रखते हैं. यह काम होता उन्होंने बचपन से देखा है अपने दादाजी कालू जल्लाद से उन्हंने यह काम सखा. पिता के निधन के बाद 1989 में यह काम अपनाया है.पवन जल्लाद की उस वक्त चर्चा और तेज हो गयी थी जब निर्भया केस में चारो गुनहगारों को एक साथ फांसी की चर्चा हुई थी.

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मथुरा जेल में 150 साल पहले महिला फांसीघर बनाया गया था. लेकिन आजादी के बाद से अब तक किसी भी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई. साल 2008 में अमरोहा में अपने ही परिवार के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काटकर हत्या करने के मामले में शबनम और उसके प्रेमी को फांसी की सजा दी गयी है. उसकी कई पीढ़ियां इस पुश्तैनी काम को करती रही हैं। पवन मेरठ में कांशीराम आवासीय कॉलोनी का रहने वाला है.

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