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Parliament Monsoon Session: लोकसभा में पीएम और सीएम को हटाने वाला बिल पेश, विपक्ष ने किया विरोध, भारी हंगामा

Updated at : 20 Aug 2025 2:34 PM (IST)
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Amit Shah introduced Three bills in Lok Sabha

विपक्ष के हंगामे से नाराज हुए अमित शाह

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन नये बिल पेश किए. जिसपर विपक्ष ने भारी विरोध किया. विपक्ष के हंगामे के बीच शाह ने बिल पेश किया. बिल में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को हटाने का प्रावधान है.

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Parliament Monsoon Session: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया. जिसपर लोकसभा में विपक्ष ने भारी विरोध किया. कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल ने तीनों बिल का भारी विरोध किया और उसे वापस लेने की मांग भी की है.

तीनों बिल की प्रतियां फाड़कर शाह की ओर फेंकी गईं

लोकसभा में संविधान (एक सौ तीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 की प्रतियाँ फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह की ओर फेंकी गईं.

तीनों विधेयकों को संयुक्त समिति के पास भेजा गया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीनों विधेयकों को संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा. सदन ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.

लोकसभा की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जैसे ही तीनों बिल को सदन में पेश किया, विपक्ष ने भारी विरोध करना शुरू कर दिया. विपक्ष ने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की. भारी हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया. सदन की कार्रवाई फिर से शुरू होने पर दोबारा विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे. जिसके बाद सदन की कार्यवाही को शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

तीनों बिल निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील साबित होगी : ओवैसी

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 को पेश किए जाने का विरोध करता हूं. यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है. यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर न्यायाधीश और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है… यह सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है. यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी. इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है.”

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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