OROP: पेंशनरों और पदक विजेताओं के लिए खुशखबरी, जल्द होगा बकाये का भुगतान, सीलबंद लिफाफे पर CJI की बड़ी टिप्पणी

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 20 Mar 2023 1:14 PM

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DY Chandrachud

सुप्रीम कोर्ट ने केद्र सरकार को निर्देश दिया है कि सत्तर वर्ष और उससे अधिक आयु के सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को इस साल 30 जून तक एक या उससे अधिक किस्तों में ओआरओपी के बकाये का भुगतान किया जाए.

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One Rank One Pension छह लाख पेंशनभोगी परिवार और वीरता पदक विजेताओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खुशखबरी मिली है. SC ने केंद्र सरकार को 30 अप्रैल तक ओआरओपी के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार ओआरओपी योजना के संदर्भ में 2022 के फैसले का पालन करने के लिए बाध्य है.

70 साल और उससे अधिक उम्र के सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को 30 जून तक बकाये भुगतान का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केद्र सरकार को निर्देश दिया है कि सत्तर वर्ष और उससे अधिक आयु के सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को इस साल 30 जून तक एक या उससे अधिक किस्तों में ओआरओपी के बकाये का भुगतान किया जाए.

एंड सीलबंद कवर बिजनेस: चीफ जस्टिस ने सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन (One Rank One Pension) के तहत पूर्व सैन्य कर्मियों को बकाये का भुगतान करने के संबंध में केंद्र द्वारा सीलबंद लिफाफे में दिए गए जवाब को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जवाब दिए जाने के चलन पर रोक लगाने की जरूरत है…यह मूल रूप से निष्पक्ष न्याय दिए जाने की बुनियादी प्रक्रिया के विपरीत है.

सीलबंद लिफाफे में जवाब दिए जाने के खिलाफ : सीजेआई

प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से सीलबंद लिफाफे में जवाब दिए जाने के खिलाफ हूं. अदालत में पारदर्शिता होनी चाहिए. यह आदेशों को अमल में लाने को लेकर है. इसमें गोपनीय क्या हो सकता है.

ओआरओपी पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की खिंचाई की

सुप्रीम कोर्ट ओआरओपी बकाये के भुगतान को लेकर ‘इंडियन एक्स-सर्विसमैन मूवमेंट’ (आईईएसएम) की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ओआरओपी के बकाये का चार किश्तों में भुगतान करने का एकतरफा फैसला करने के लिए 13 मार्च को सरकार की खिंचाई की थी.

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By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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