हथियार डिपो-तोपखाना-चौकियों को किया तबाह… ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने PoK में आतंक की तोड़ी कमर
Published by : Pritish Sahay Updated At : 20 May 2025 6:08 PM
Operation Sindoor
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर में आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सेना ने कम से कम तीन चौकियां, एक गोला-बारूद डिपो, ईंधन भंडारण केंद्र और तोपखाना समेत अन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया. भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी विनाशकारी थी कि पाकिस्तान को इसे फिर से बनाने में कम से कम आठ से 12 महीने लगेंगे, संभवतः इससे भी अधिक समय लगेगा.
Operation Sindoor: पहलगाम पर हुए आतंकी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान में तनाव जारी है. हालांकि दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है, लेकिन आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है. पुंछ ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर मुदित महाजन ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, यह सिर्फ़ कुछ समय के लिए स्थगित है.” आतंकियों के खिलाफ भारत की ओर से शुरू किए गए ऑपरेशन में आतंकियों को काफी नुकसान पहुंचा है. जम्मू और कश्मीर के पुंछ में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी चौकियों और आतंकवादी शिविरों काफी नुकसान पहुंचाया गया था. पीओके में भारतीय सेना ने आतंक और आतंकियों की कमर तोड़ दी है.
‘कुछ समय के लिए स्थगित हुआ है ऑपरेशन सिंदूर’
पुंछ ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर मुदित महाजन ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगातार कठिन ऑपरेशन हुआ. पुंछ ब्रिगेड ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा नहीं, बल्कि उसका मुख्य आधार था. पहलगाम हमले का जवाब भारतीय सेना ने सोच समझ के साथ दिया. जब पाकिस्तानी सेना ने नागरिक क्षेत्रों को अंधाधुंध तरीके से निशाना बनाकर हमला करना शुरू किया, तब भारतीय सेना ने निर्णायक रूप से उनके सैन्य ठिकानों पर हमला करना शुरू किया. पाकिस्तानी सेना को सिर्फ़ संख्या में ही नुकसान नहीं हुआ, बल्कि मनोबल और पहल में भी नुकसान हुआ. आज उन्होंने अपने ही देश के सामने अपनी विश्वसनीयता खो दी है. हमारे पास जानकारी है कि दुश्मन को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा है. हमें बहुत सैनिकों के मारे जाने और उससे कहीं ज्यादा के घायल होने की सूचना मिली है. ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, यह सिर्फ़ कुछ समय के लिए स्थगित है.”
पीओके की लीपा घाटी में सैन्य बुनियादी ढांचा किया गया नष्ट
भारतीय सेना की चिनार कोर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लीपा घाटी में सैन्य बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है. भारतीय सेना के अधिकारियों का अनुमान है कि बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में पाकिस्तान को आठ से 12 महीने लगेंगे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मई के दूसरे सप्ताह में संघर्ष विराम उल्लंघन के जवाब में भारतीय सेना ने इस पाकिस्तानी सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया था. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय नेता के अधिकारियों ने बताया कि “हमने कम से कम तीन चौकियों, एक गोला-बारूद डिपो, ईंधन भंडारण केंद्र और तोपखाना समेत अन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया. हमारी जवाबी कार्रवाई इतनी विनाशकारी थी कि पाकिस्तान को इसे फिर से बनाने में कम से कम आठ से 12 महीने लगेंगे, संभवतः इससे भी अधिक समय लगेगा.”
विफल कर दिए पाकिस्तान के सभी हमले
सेना के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने भारतीय ठिकानों को निशाना बनाने के लिए हवाई प्लेटफॉर्म सहित भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंच पाए. “हमारी स्वदेशी रूप से विकसित आकाशदीप रडार प्रणाली ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि हमारी वायु रक्षा तोपों ने उनके हवाई प्लेटफॉर्म को बेअसर कर दिया. हमारा सैन्य बुनियादी ढांचा बरकरार है, जबकि दुश्मन का ढांचा नष्ट हो गया है.” अधिकारियों ने बताया कि लीपा घाटी में कई खाली सैन्य ढांचे मौजूद थे, लेकिन भारतीय सेना ने केवल उन्हीं को निशाना बनाया जहां अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सकता था.
पाकिस्तान को भारी भरकम नुकसान
विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने कहा कि मई के दूसरे सप्ताह में जवाबी हमलों के दौरान चिनार कोर द्वारा कम से कम 64 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए और 96 घायल हुए. चिनार कोर के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया “संदेश स्पष्ट था – हमारी जवाबी कार्रवाई एक अनुपात तीन में होगी, जिसका अर्थ है कि भारतीय सेना हर पाकिस्तानी संघर्ष विराम उल्लंघन के लिए तीन गुना अधिक जोरदार हमला करेगी.” ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने छह-सात मई की रात को पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने आठ, नौ और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की. दोनों देश चार दिन बाद 10 मई को सशस्त्र संघर्ष रोकने पर सहमत हुए.
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By Pritish Sahay
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