ओडिशा रेल हादसे के बाद 'कवच' को लेकर छिड़ी बहस, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया एक्सीडेंट की असली वजह

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रेलगाड़ियों को टकराने से बचाने वाली ‘कवच’ प्रणाली को लेकर छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस ने रेल मंत्री से इस्तीफे की मांग की और सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस बहुप्रचारित प्रणाली को देशभर में कब लागू करेगी. वैष्णव ने कहा कि रेल हादसे का ‘कवच’ प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं है.

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ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार को हुए भीषण रेल हादसे के कारण का पता चल गया है और इसके लिये जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है. हादसे में कुल 275 लोगों की मौत हो गयी, तो 1100 से अधिक लोग घायल हो गये हैं. फिलहाल दुर्घटनास्थल पर बचाव कार्य पूरा हो गया है. इस बीच रेल हादसे को लेकर राजनीति भी तेज हो गयी है. कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने हादसे को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला किया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस्तीफा भी मांगा. रेल हादसे के बाद कवच प्रणाली को लेकर भी बहस शुरू हो गयी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब कांग्रेस ने भी कवच को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है.

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ की वजह से हुआ रेल हादसा

रेल मंत्री ने बालासोर रेल हादसे के पीछे की वजह के बारे में खुलासा किया. उन्होंने कहा, हादसे की वजह रेलवे सिग्नल के लिए अहम उपकरण ‘प्वाइंट मशीन’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ प्रणाली से संबंधित है. वैष्णव ने कहा कि ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ में किए गए उस बदलाव की पहचान कर ली गई है जिसके कारण यह हादसा हुआ. प्वाइंट मशीन की सेटिंग में बदलाव किया गया है. यह कैसे और क्यों किया गया, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट में किया जाएगा. रेल मंत्री ने कहा, इस भीषण घटना के कारण का पता चल गया है…मैं इस पर विस्तार से बात नहीं करना चाहता. रिपोर्ट आने दीजिए. मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि असल वजह और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है.

रेल हादसे का ‘कवच’ प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं

रेलगाड़ियों को टकराने से बचाने वाली ‘कवच’ प्रणाली को लेकर छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस ने रेल मंत्री से इस्तीफे की मांग की और सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस बहुप्रचारित प्रणाली को देशभर में कब लागू करेगी. वैष्णव ने कहा कि रेल हादसे का ‘कवच’ प्रणाली से कोई लेना-देना नहीं है.

क्या है इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन

इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन त्वरित संचालन और ‘प्वाइंट स्विच’ को लॉक करने के लिए रेलवे सिग्नल का महत्वपूर्ण उपकरण है तथा वह रेलगाड़ियों के सुरक्षित परिचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इन मशीनों के काम न करने की स्थिति में ट्रेन संचालन पर गंभीर असर पड़ता है और इन्हें लगाते समय हुई खामियों की वजह से असुरक्षित स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं.

बालासोर रेल हादसे में अबतक गयी 275 लोगों की जान

गौरतलब है कि बालासोर में बाहानगा बाजार रेलवे स्टेशन के पास शुक्रवार शाम करीब सात बजे कोरोमंडल एक्सप्रेस के मुख्य लाइन के बजाय लूप लाइन में प्रवेश करने के बाद वहां खड़ी एक मालगाड़ी से टकरा गई थी. इस हादसे की चपेट में बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी आ गई थी. इस दुर्घटना में कम से कम 275 लोगों की मौत हुई है और 1100 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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