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Obesity: भारत में सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभर रहा है मोटापा

Updated at : 20 Dec 2025 7:48 PM (IST)
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Obesity: भारत में सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभर रहा है मोटापा

मोटापा एक गंभीर समस्या है जिसे केवल डॉक्टर के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है. हर नागरिक की इसमें भूमिका है. भारत में 63% मौतें गैर-संक्रामक रोगों से जुड़ी हैं जो किसी न किसी रूप में मोटापे से संबंधित हैं.

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Obesity: भारत में मोटापा की समस्या से लोग परेशान हैं. मोटापा को दूर करने के लिए बाजार में तरह तरह की दवाइयां भी आ रही है और तरह-तरह के दावे भी उन  किया जा रहा है, लेकिन समस्या और बढ़ती ही जा रही है. केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने “एशिया ओशिनिया कॉन्फ्रेंस ऑन ओबेसिटी” (एओसीओ) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में उपलब्ध वजन घटाने वाली या मोटापा कम करने वाली दवाओं का उपयोग बहुत ही विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए. 

जितेंद्र सिंह स्वयं एक प्रख्यात मधुमेह विशेषज्ञ और चिकित्सा के प्रोफेसर हैं, उन्होंने कहा कि मोटापा एक जटिल, दीर्घकालिक और बार-बार होने वाला विकार है, न कि केवल एक सौंदर्य संबंधी या जीवनशैली से जुड़ी चिंता. उन्होंने भारत की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक के रूप में उभरी इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समग्र समाज के दृष्टिकोण का आह्वान किया. मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और अन्य हितधारकों का एक मंच पर एकत्रित होना ही भारत में मोटापे की महामारी की बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अर्थशास्त्र इतना गंभीर विषय है कि इसे केवल एक अर्थशास्त्री के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, उसी प्रकार मोटापा भी इतना गंभीर विषय है कि इसे केवल एक चिकित्सक या महामारी विज्ञानी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसकी गहरी सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जड़ें हैं.


स्वस्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी की जरूरत

उन्होंने बताया कि भारत में करीब 63 प्रतिशत मौतें गैर-संक्रामक रोगों के कारण होती हैं, जो किसी न किसी रूप में मोटापे से जुड़ी हैं. टाइप-2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी बीमारियों का सीधा संबंध मोटापे से है, खासकर भारतीयों में पाए जाने वाले केंद्रीय (आंतरिक) मोटापे से. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंचों से मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर लगातार चर्चा होना यह दर्शाता है कि यह अब देश की स्वास्थ्य प्राथमिकता बन चुकी है. फिट इंडिया, खेलो इंडिया और खान-पान में छोटे लेकिन निरंतर बदलावों पर जोर इसी दिशा में अहम कदम हैं. 

उन्होंने कहा कि तथाकथित त्वरित समाधान लोगों को गुमराह करते हैं और प्रमाण-आधारित इलाज से दूर ले जाते हैं. डिजिटल और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग के जरिए मिथकों और गलत जानकारियों से मुकाबला करने की जरूरत है. युवाओं तक जागरूकता पहुंचाने पर बल देते हुए  उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए स्वस्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी जरूरी है.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक साथ लाकर, एओसीओ मोटापे को न केवल एक चिकित्सीय बल्कि एक सामाजिक चुनौती का समाधान करना चाहता है जिसके लिए समन्वित कार्रवाई, निरंतर जागरूकता और सूचित सार्वजनिक भागीदारी की आवश्यकता है.

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Anjani Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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