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चीन को केवल सैन्‍य ताकत से ही नहीं, आर्थिक रूप से भी मारेगा भारत, मोदी सरकार ने बनाया बड़ा प्‍लान

Updated at : 22 Jun 2020 7:37 AM (IST)
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चीन को केवल सैन्‍य ताकत से ही नहीं, आर्थिक रूप से भी मारेगा भारत, मोदी सरकार ने बनाया बड़ा प्‍लान

Galwan valley, Violent clash, between India and China soldiers, Indo-China face-off लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प की घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. भारत ने चीन के सभी 'नापाक' चालों का 'मुंह तोड़' जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चीन को इस बार न केवल सैन्‍य ताकत से बल्‍कि आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की तैयारी में है.

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नयी दिल्‍ली : लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प की घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. भारत ने चीन के सभी ‘नापाक’ चालों का ‘मुंह तोड़’ जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चीन को इस बार न केवल सैन्‍य ताकत से बल्‍कि आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की तैयारी में है.

सूत्रों के हवाले से खबर है कि मोदी सरकार ने इंडस्‍ट्री से विदेशों से आने वाले सामानों, खास कर चीन से आने वाले सामानों की पूरी रिपोर्ट मांगी है. खबर है इसका उद्देश्‍य चीन से आने वाने खराब सामनों पर रोक और देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना है.

कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बाद आत्‍मनिर्भर भारत की बात की है. सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में हाल में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में चीन के आयात पर निर्भरता खत्म करने और आत्म निर्भर भारत को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई. एक सूत्र ने बताया कि उद्योगों से चीन से आयातित कुछ सामानों और कच्चे माल पर टिप्पणी और सुझाव देने के लिए कहा गया है. इन उत्पादों में कलाई घड़ी, दीवार घड़ियां, इंजेक्शन की शीशी, कांच की छड़ें और ट्यूब, हेयर क्रीम, हेयर शैंपू, फेस पाउडर, आंख और होंठ के मेकअप का सामान, प्रिंटिंग की स्याही, पेंट और वार्निश तथा कुछ तम्बाकू का सामान शामिल है.

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इसके साथ ही सरकार ने 2014-15 और 2018-19 के बीच आयात में हुई बढोतरी, एक जैसे उत्पाद को यहां बनाने पर उनकी घरेलू लागत, घरेलू क्षमता, मुक्त व्यापार समझौतों के तहत आयात और यदि कहीं कच्चे माल पर तैयार माल के मुकाबले अधिक कर हो, तो उन सभी का ब्यौरा मांगा गया है. मालूम हो चीन के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार माना जाता है. भारत में बड़े पैमाने पर चीनी उत्‍पादों की बिक्री होती है. हालांकि चीन के साथ सीमा विवाद के बाद एक बार फिर से देशभर में चीनी उत्‍पादों का विरोध किया जा रहा है.

उद्योग सूत्रों ने कहा कि उन्होंने इन सभी उत्पादों पर अपनी राय तैयार कर ली है और जल्द ही उसे वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय को भेज दिया जाएगा. चीन के साथ सीमा पर तनाव के मद्देनजर वहां से आयात को कम करने और रोकने की कवायद महत्वपूर्ण है. भारत के आयात में लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा चीन का है, जिसमें मोबाइल फोन, दूरसंचार, बिजली, प्लास्टिक के खिलौने और फार्मास्युटिकल उत्पाद जैसे सामान उल्लेखनीय हैं.

सरकार ने LAC पर चीन को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए सेना को दी पूरी छूट

चीन के साथ लगती 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सशस्त्र बलों को चीन के किसी भी आक्रामक बर्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने की पूरी आजादी दी गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ लद्दाख में हालात पर उच्च स्तरीय बैठक के बाद सूत्रों ने यह जानकारी दी.

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रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने हिस्सा लिया. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद भारत ने चीन से लगती सीमा पर अग्रिम इलाकों में लड़ाकू विमान और हजारों की संख्या में अतिरिक्त सैनिकों को भेजा है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है कि, भारत शांति चाहता है लेकिन अगर उकसाया गया तो मुंह तोड़ तवाब देने में सक्षम है. एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि अब से हमारा तरीका अलग होगा। ग्राउंड कमांडरों को स्थिति के अनुसार फैसला लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है.

गौरतलब है कि भारतीय वायु सेना ने पिछले पांच दिन में लेह और श्रीनगर सहित वायु सेना के अहम अड्डों पर सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर, मिराज 2000 विमान और अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर तैनात कर दिए हैं.

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वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने शनिवार को कहा था कि भारतीय वायु सेना चीन के साथ लगती सीमा पर किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उपयुक्त जगह पर तैनात है. मालूम हो पूर्वी लद्दाख में पांच और छह मई को करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद हालात बिगड़ गए थे.

posted by – arbind kumar mishra

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