New Parliament Building : नये संसद भवन में कैसी है लोकसभा और राज्यसभा की डिजाइन, 28 को पीएम करेंगे उद्‌घाटन

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New Parliament Building : नये संसद भवन में कैसी है लोकसभा और राज्यसभा की डिजाइन, 28 को पीएम करेंगे उद्‌घाटन

नये संसद भवन में सांसदों के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था की गयी है, ताकि बैठने में कोई परेशानी ना हो. नये संसद भवन का निर्माण 65 हजार वर्गमीटर में किया गया है.

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नये संसद भवन का उद्‌घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को करने वाले हैं. नया संसद भवन कैसा है, इसे लेकर लोगों के मन में उत्सुकता है और यही वजह है कि हम आपके लिए यह खबर लिख रहे हैं, जिसमें नयी संसद के बारे में अधिक से अधिक पुख्ता जानकारी देने की कोशिश की गयी है.

नयी संसद की जरूरत क्यों?

सबसे पहले लोगों के मन में यह बड़ा सवाल है कि जब देश में इतनी खूबसूरत और भव्य संसद है तो नयी संसद की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब यह है कि हमारी जो वर्तमान संसद है, उसका निर्माण संसद भवन के तौर पर नहीं किया गया था, यही वजह है कि यहां सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और जब दोनों सदन का संयुक्त सत्र होता है, तो परेशानी और बढ़ जाती है. अभी लोकसभा में 545 सीट है, लेकिन 2026 के परिसीमन के बाद यह सीट बढ़ जायेगी, तब सांसदों के बैठने के लिए जगह और कम पड़ेगी. यहां सुरक्षा को लेकर भी जोखिम बना हुआ है.

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नयी और पुरानी संसद मिलकर करेगी काम

नये संसद भवन में सांसदों के लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था की गयी है, ताकि बैठने में कोई परेशानी ना हो. नये संसद भवन का निर्माण 65 हजार वर्गमीटर में किया गया है. इसके त्रिकोणीय आकार का उद्देश्य ही संसद को ज्यादा बड़ा और खुला-खुला बनाना है. https://centralvista.gov.in/ पर दी गयी जानकारी के अनुसार नयी संसद और वर्तमान संसद एक साथ मिलकर काम करेगी ताकि काम ज्यादा सुचारू रूप से चल सके.

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लोकसभा में 1272 सांसद बैठ सकेंगे

नये संसद भवन में विधायिका के लिए बड़े-बड़े कक्ष होंगे. अभी लोकसभा में 545 लोगों के बैठने की जगह है, जबकि नये भवन में 888 सीटों की क्षमता वाली लोकसभा होगी, जबकि राज्यसभा में 384 सीटों की क्षमता होगी. संयुक्त सत्र के लिए लोकसभा में 1272 सीटें बनायी जा सकेगी. इसी बात को ध्यान में रखकर इसका आकार त्रिकोणीय बनाया गया है. लोकसभा का निर्माण राष्ट्रीय पक्षी मयूर की थीम पर कराया गया है. वहीं राज्यसभा में भी पर्याप्त जगह होगी और इसका निर्माण राष्ट्रीय फूल कमल के तर्ज पर किया गया है. सेंट्रल लाउंज का निर्माण खुले प्रांगण के पूरक के तौर पर किया जा रहा है जहां सदस्य आराम से बैठकर चर्चा कर सकेंगे.

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भारतीय कला-संस्कृति की मिलेगी झलक

संसद के नये भवन में एक बेहतरीन पुस्तकालय होगा, जहां एक से एक किताबें होंगी. परिसर में महात्मा गांधी, पटेल सहित कई बड़े नेताओं की मूर्ति होगी. साथ ही यहां भारतीय संस्कृति की छाप नजर आयेगी. प्रांगण में बरगद का पेड़ लगा होगा.यहां जो कार्यालय होंगे वे आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे. साथ ही यहां आॅडियो और वीडियो की सुविधा भी हाई क्लास होगी. संविधान हाॅल का डिजाइन भी बहुत बेहतरीन अंदाज में किया गया है जिसके केंद्र में संविधान है. संसद के नये भवन में भारतीय कला – संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित संसद भवन का निर्माण किया गया है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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