Muslim वोटर AAP के या कांग्रेस के साथ? दिल्ली में वोटिंग से पहले असमंजस में फंसे

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 03 Feb 2025 9:25 PM

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Muslim voters in Delhi

Muslim: दिल्ली में 22 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिसमें मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है. इन सभी सीटों पर राजनीतिक पार्टियों की नजर है. खासकर सत्तारूढ़ AAP और कांग्रेस की नजरें मुस्लिम बहुल सीटों पर टिकी हैं.

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Muslim: मुस्लिम वोटरों के लिए भी असमंजस की स्थिति है, वो आम आदमी पार्टी के साथ जाएंगे या कांग्रेस के साथ. राजनीतिक पंडितों के अनुसार, दिल्ली के मुस्लिम वोटर परंपरागत तौर पर कांग्रेस को वोट देते आए हैं लेकिन 2015 में वह कांग्रेस का ‘हाथ’ छोड़ AAP के पाले में चले गए. 2020 के चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय ने और मजबूती से अरविंद केजरीवाल की पार्टी को साथ दिया. इसका नतीजा हुआ, पिछले चुनाव में ज्यादातर मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके.

इन सीटों से मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते आए

दिल्ली की पांच सीटें– सीलमपुर, मुस्तफाबाद, मटिया महल, बल्लीमारान और ओखला से अक्सर मुस्लिम उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंचते रहे हैं. चाहे वो किसी भी पार्टी से क्यों न हों. इसके अलावा बाबरपुर, गांधीनगर, सीमापुरी, चांदनी चौक, सदर बाजार, किराड़ी, जंगपुरा व करावल नगर समेत 18 सीट ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 10 से 40 फीसदी मानी जाती है. इन सीटों में मुस्लिम समुदाय निर्णायक भूमिका अदा करता रहा है.

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मौजूदा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को साधना AAP के लिए आसान नहीं

मौजूदा चुनाव में मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करना आसान नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि 2020 के दंगे, कोरोना महामारी के दौरान तब्लीगी जमात और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर केजरीवाल की पार्टी ने चुप्पी साध ली थी. जिससे मुस्लिम वोटरों में आप को लेकर नाराजगी भी है.

दिल्ली में मुस्लिमों की आबादी 13 फीसदी

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली में मुस्लिम आबादी करीब 13 फीसदी थी. जानकार मानते हैं कि इस बार मुस्लिम मतदाता सत्तारूढ़ ‘आप’ और कांग्रेस को लेकर असमंजस में है.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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