Morbi Bridge Collapse: 'पुल को नहीं खोला जाना चाहिए था', Civic Body ने गुजरात त्रासदी को स्वीकार किया
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 18 Nov 2022 6:32 AM
मोरबी पुल हादसे पर नगर पालिका ने गुजरात हाईकोर्ट में बताया कि जिस कंपनी को पुल के नवीनीकरण का जिम्मा सौंपा गया था उसने बिना किसी पूर्व स्वीकृति और मरम्मत कार्य के बारे में नगर निकाय को सूचित किए बिना इसे फिर से खोल दिया.
मोरबी नगर पालिका ने गुजरात हादसे में गलती स्वीकार कर ली है. गुजरात हाईकोर्ट में Civic Body ने माना की पुल को नहीं खोला जाना चाहिए था.
कंपनी ने बिना पूर्व स्वीकृति के पुल को आम लोगों के लिए खोला
मोरबी पुल हादसे पर नगर पालिका ने गुजरात हाईकोर्ट में बताया कि जिस कंपनी को पुल के नवीनीकरण का जिम्मा सौंपा गया था उसने बिना किसी पूर्व स्वीकृति और मरम्मत कार्य के बारे में नगर निकाय को सूचित किए बिना इसे फिर से खोल दिया. गौरतलब है मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी.
करार के अनुसार कंपनी को नवीनीकरण पूरा होने के बाद स्विकृति के बाद खोलना था पुल
बुधवार को उच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे में नगर पालिका ने यह भी बताया कि 2022 में नगर निकाय और कंपनी के बीच हुए एक करार के मुताबिक अजंता कंपनी को पुल का नवीनीकरण करना था और सिर्फ तभी जनता के लिये खोलना था. खंडपीठ पुल ढहने के मामले में स्वत:संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है.
कोर्ट ने पूछा, ओरेवा समूह को मंजूरी नहीं होने के बावजूद पुल के उपयोग की अनुमति क्यों दी गई
कोर्ट ने जानना चाहा कि अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ओरेवा समूह) को इस्तेमाल के लिए कोई मंजूरी नहीं होने के बावजूद पुल का उपयोग करने की अनुमति क्यों दी गई. कोर्ट ने यह भी पूछा कि जून 2017 के बाद कंपनी किस आधार पर पुल का संचालन कर रही थी. जब करार को नवीनीकृत नहीं किया गया. इस पर नगर निकाय ने कहा कि जब राजकोट कलेक्टर और कंपनी के बीच 2007 एमओयू, 15 अगस्त, 2017 को समाप्त हो गया था, तब भी झूला पुल का रखरखाव और प्रबंधन कंपनी द्वारा जारी रखा गया था, क्योंकि कोई नया समझौता नहीं हुआ था और आठ मार्च, 2022 को नये समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मरम्मत के लिए इसे बंद किए जाने तक वही कंपनी इसके रखरखाव का काम कर रही थी.
मोरबी पुल हादसे में गयी थी 135 लोगों की जान
गौरतलब है कि मोरबी में 30 अक्टूबर को मच्छु नदी पर ब्रिटिश काल में बने झूला पुल के गिरने से महिलाओं और बच्चों सहित 135 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे से पांच दिन पहले ही जीर्णोद्धार के बाद पुल को खोला गया था.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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