शिक्षा और स्वास्थ्य पूरी तरह बन गए हैं व्यवसाय, मोहन भागवत ने जताई चिंता

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Aug 2025 6:39 AM

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Mohan Bhagwat News

Mohan Bhagwat : इंदौर में एक कैंसर अस्पताल के उद्घाटन पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शिक्षा और स्वास्थ्य की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पहले ये सेवा मानी जाती थी, लेकिन अब पूरी तरह व्यवसाय बन गए हैं, जिससे आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं.

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Mohan Bhagwat : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के व्यावसायीकरण पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इन दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आम लोगों को ‘सहज, सुलभ, सस्ती और सहृदय’ सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की जरूरत है. भागवत इंदौर में कैंसर मरीजों के किफायती इलाज के लिए बने ‘माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे. यह केंद्र ‘गुरुजी सेवा न्यास’ नामक परमार्थ संगठन द्वारा शुरू किया गया है. उन्होंने दोनों मुद्दों पर सुधार की जरूरत भी बताई.

संघ प्रमुख ने इस मौके पर एक समारोह में कहा, “(अच्छी) स्वास्थ्य और शिक्षा की सारी योजनाएं आज समाज के हर व्यक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता बन गई है, लेकिन दुर्भाग्य ऐसा है कि दोनों क्षेत्रों की (अच्छी) सुविधाएं आम आदमी की पहुंच और आर्थिक सामर्थ्य के दायरे से बाहर हैं.” उन्होंने कहा, “पहले स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में सेवा की भावना से काम किए जाते थे, लेकिन अब इन्हें भी ‘कमर्शियल’ (वाणिज्यिक) बना दिया गया है.”

कैंसर के महंगे इलाज पर भी चिंता जताई संघ प्रमुख ने

संघ प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि जनता को कमर्शियल और शिक्षा के क्षेत्रों में ‘सहज, सुलभ, सस्ती और सहृदय’ सुविधाएं मुहैया कराया जाना वक्त की मांग है और ये सुविधाएं अधिक से अधिक स्थानों पर होनी चाहिए. भागवत ने कहा कि ‘व्यावसायीकरण’ के कारण इन सुविधाओं का ‘केन्द्रीकरण’ भी हो जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘यह कॉर्पोरेट का जमाना है, तो शिक्षा (सुविधाओं) का हब (केंद्र) बन जाता है.’’ संघ प्रमुख ने देश में कैंसर के महंगे इलाज पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कैंसर के इलाज की बहुत अच्छी सुविधाएं केवल आठ-दस शहरों में मौजूद हैं, जहां देश भर के मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी धनराशि खर्च करके जाना पड़ता है.

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भागवत ने आम लोगों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा की अच्छी सुविधाएं पेश करने के वास्ते समाज के सक्षम और समर्थ लोगों से आगे आने का आह्वान किया.

सीएसआर को लेकर क्या बोले संघ प्रमुख

संघ प्रमुख भागवत ने कहा, “कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) जैसे शब्द बेहद टेक्निकल (तकनीकी) और फॉर्मल (औपचारिक) हैं. सेवा के संदर्भ में हमारे यहां एक शब्द है-धर्म.. धर्म यानी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाना.. धर्म समाज को जोड़ता है और समाज को उन्नत करता है..” भागवत ने यह भी कहा कि पश्चिमी मुल्क विविधता पर विचार किए बगैर स्वास्थ्य क्षेत्र के अपने मानक पूरी दुनिया पर लागू करने की सोच रखते हैं, लेकिन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में मरीजों का उनकी अलग-अलग प्रकृति के आधार पर विशिष्ट तौर पर इलाज किया जाता है.

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उन्होंने कहा कि कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनमें एलोपैथी के जानकार भी आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सलाह देते हैं और इसी तरह कुछ रोगों के मामले में होम्योपैथी और नेचुरोपैथी ज्यादा कारगर मानी जाती हैं. संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘मेरा यह दावा बिल्कुल नहीं है कि कोई चिकित्सा पद्धति श्रेष्ठ या कमतर है, लेकिन मनुष्यों की विविधता को ध्यान में रखते हुए मरीजों को इलाज के सभी विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए.’’

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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