दीपक कुमार की जिम में थे 150 मेंबर, 'मोहम्मद दीपक' कहने के बाद बचे सिर्फ 15

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Feb 2026 9:37 AM

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मोहम्मद दीपक विवाद (Photo: X)

Mohammad Deepak Controversy : विवाद से पहले कोटद्वार के बदरीनाथ रोड पर स्थित हल्क जिम में करीब 150 सदस्य थे। अब यह संख्या घटकर सिर्फ 15 रह गई है.

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Mohammad Deepak Controversy : उत्तराखंड में जिम चलाने वाले दीपक कुमार पिछले कुछ दिन से चर्चा में है. उन्होंने एक 70 साल के मुस्लिम दुकानदार को बजरंग दल के कथित सदस्यों से बचाते समय खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया था. वह अब पैसों की तंगी से गुजर रहे हैं. ndtv.com के अनुसार, विवाद से पहले कोटद्वार के बदरीनाथ रोड पर स्थित हल्क जिम में करीब 150 सदस्य थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 15 रह गई है. इससे दीपक की आर्थिक हालत बिगड़ गई है.

खबर के अनुसार, जिम के लिए दीपक कुमार को हर महीने 40 हजार रुपये किराया देना पड़ता है. वहीं घर के लोन की किश्त 16 हजार रुपये है. फिलहाल घर का खर्च उनकी 70 वर्षीय मां की चाय की दुकान से चल रहा है.

घटना 26 जनवरी को शुरू हुई

यह घटना 26 जनवरी को शुरू हुई. उस वक्त भीड़ ने वकील अहमद की दुकान, बाबा स्कूल ड्रेस, को निशाना बनाया. भीड़ ने “बाबा” नाम पर आपत्ति जताई. भीड़ का कहना था कि इसे स्थानीय सिद्धबली बाबा मंदिर के नाम से भ्रमित किया जा सकता है. हालांकि, स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में कई अन्य दुकानों में भी “बाबा” शब्द का इस्तेमाल होता है. इससे यह आरोप उठे कि अहमद को सिर्फ उनकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया.

मोहम्मद दीपक नाम बताने के बाद विवाद बढ़ा

जब दीपक ने बुजुर्ग दुकानदार की रक्षा की, तो भीड़ ने उसका नाम पूछा. उन्होंने साहस से जवाब दिया, मेरा नाम मोहम्मद दीपक है. इसके बाद सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हुआ. कई लोग दीपक के समर्थन में भी आए. सोशल मीडिया पर दीपक की बहादुरी की खूब तारीफ हुई, लेकिन उनके लिए ऑनलाइन निगेटिव कमेंट भी आए.

पिछले हफ्ते, CPI(M) राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टास कोटद्वार में दीपक के साथ गए. उन्होंने सिम्बॉलिक रूप से जिम की सदस्यता ली. राहुल गांधी ने उन्हें “भारत का हीरो” भी बताया.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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