MiG-21 Retires: भारतीय वायुसेना का एक ऐसा योद्धा, जिसने कभी हार नहीं मानी, पाकिस्तान को चटाई धूल

Edited by Pritish Sahay
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mig 21

MiG-21 Retires: आज फिर एक युग का अंत हो गया और भारत ने अपने एक वीर योद्धा को विदाई दे दी. मिग-21 वो विमान है जिसने 1965, 1971 और 1999 की जंगों में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था , जो अब इतिहास बन चुका है. 60 साल तक आसमान में गरजने वाला ये सुपरसोनिक फाइटर सिर्फ मामूली सा विमान नहीं था बल्कि भारतीय वायुसेना की शान था. 1,200 से ज्यादा मिग-21 ने देश की हिफाजत की, दुश्मन के दिलों में खौफ और देशवासियों के दिलों में गर्व पैदा किया. अब तेजस इसकी जगह ले रहा है, लेकिन मिग-21 की बहादुरी, जज़्बा और कहानियां कभी नहीं मिटेंगी. जानिए कैसे बना ये लड़ाकू विमान भारत की विजयगाथा का नायक.

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MiG-21 Retires: भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 शुक्रवार को रिटायर हो गया. लेकिन, इसकी वीरता की कई कहानियां हमेशा याद की जाएंगी. खासकर, मिग-21 तब-तब याद किया जाएगा, जब भारत पाकिस्तान के साथ हुई जंग में मिली जीत को याद करने के लिए विजय दिवस मनाएगा. इसका कारण यह है कि भारतीय वायुसेना में बाज कहे जाने वाले मिग-21 ने 1965, 1971 और 1999 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में उसके लड़ाकू विमानों को धूल चटाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी. मिग-21 भारतीय वायुसेना का एक ऐसा योद्धा था, जिसने कभी हार नहीं मानी उल्टे दुश्मनों के विमानों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया.

वायुसेना के बेड़े में कब शामिल हुआ मिग-21

साल 1963 में पहली बार मिग-21 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना में शामिल की गया था. तब से अब तक 1,200 से ज्यादा मिग-21 विमानों ने देश की रक्षा की है. आज, छह दशकों के लंबे सफर के बाद मिग-21 ने अपनी आखिरी उड़ान भरी. मिग-21 का इतिहास सिर्फ एक पुराने जमाने का विमान नहीं है, बल्कि एक ऐसा योद्धा है जो आज तक कभी हार नहीं माना. भले ही आज के जमाने में और भी कई नए और आधुनिक लड़ाकू विमान आ चुके हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना के इतिहास में मिग-21 जैसा योद्धा आज तक नहीं आया. भारत और पाकिस्तान के बीच चार युद्धों में इसने बहादुरी से हिस्सा लिया. इसने बहादुरी के साथ हर बार जीत दिलाई. मिग-21 सिर्फ एक विमान नहीं, भारतीय वायुसेना की पहचान बन गया था. उसने सालों तक हमला, रक्षा और निगरानी जैसे कई अहम कामों को बखूबी अंजाम दिया.

क्या है मिग-21?

मिग-21 एक मशहूर लड़ाकू विमान है, जिसे 1950 के दशक में सोवियत संघ (अब रूस) ने बनाया था. इसने पहली बार 1955 में उड़ान भरी थी. यह दुनिया का पहला ऐसा जेट विमान था जो ध्वनि की गति से तेज उड़ सकता था. इसे सुपरसोनिक फाइटर जेट कहा जाता है. मिग-21 की सबसे बड़ी ताकत थी इसकी तेज रफ्तार. यह मैक 2 की स्पीड तक पहुंच सकता था, यानी ध्वनि से करीब दो गुना तेज उड़ता था.

सिर्फ एक झलक थी 1965 की जंग

मिग-21 ने आज तक बहुत से युद्धों में दुश्मनों को धूल चटाई है. ऐसी ही एक जंग 1965 की थी, जब पाकिस्तान भारत के साथ अपने अमेरिकी फाइटर जेट्स से लड़ रहा था. मिग-21 और भारतीय वायुसेना दोनों की प्रशिक्षण अधूरी थी, मगर किसी ने हार नहीं मानी और दुश्मनो के छक्के छुड़ा दिए. मिग 21 ने अपनी स्पीड और सटीक हमले से पाकिस्तान को हक्का-बक्का कर दिया था. यह जंग मिग-21 के लिए सीखने का मौका था.

1971 में मिग-21 ने तोड़ी पाकिस्तान की रीढ़

भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 जब पाकिस्तान के खिलाफ 1971 की जंग में उतरा, तो उसने पाकिस्तानी वायुसेना एफ-104 स्टारफाइटर के 2 विमान, शेनयांग एफ-6 के दो विमान, 1 एफ-86 सेबर और 1 सी-130 हर्क्यूलिस को मार गिराया और भारत की जीत में अपनी अहम भूमिका निभाई. अपने सटीक हमले से दुश्मन देश के कई रनवे को बर्बाद कर दिया था. मिग-21 की बहादुरी देख कर जंग में पाकिस्तान के 93000 से अधिक सैनिकों ने हथियार डाल दिए थे.

कारगिल की जंग में पाकिस्तान को खदेड़ा

कारगिल जंग में मिग-21 ने दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा मिग-21 ने दुश्मन देश के फाइटर जेट को मारकर भारत की ताकत का एहसास कराया था. टोही मिशन और लक्ष्य भेदन में भी मिग-21 ने अपनी उपयोगिता साबित की थी. उपमहाद्वीप की पहली सुपरसोनिक हवाई लड़ाई में मिग-21 एफएल ने जीएसएच-23 तोप से पाकिस्तानी एफ-104 को मार गिराया था. मिग-21 ने एफ-104 को हरा दिया, जिसके बाद पाकिस्तान ने सभी एफ-104 बंद कर दिए थे . इसके अलावा, मिग-21 ने रात के समय कम ऊंचाई पर पाकिस्तान के अंदर गहरे हमले भी किए थे. अमृतसर से उड़कर ढाका के गवर्नर हाउस पर भी 500 किलो के बम गिराए थे.

रिपोर्ट: सौम्या शाहदेव

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Pritish Sahay

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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