Middle East War: पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक, भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता

भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं. युद्ध के जहाजों की आवाजाही बंद है. इसके बावजूद भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई काे सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए ताकि देश के आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना
Middle East War: मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है. इस संकट का असर भारत पर भी पड़ रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही बाधित होने के कारण पेट्रोलियम और गैस का संकट लगातार गहराता जा रहा है. पूरी दुनिया में लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है. संकट खत्म होने की बजाय समय के साथ और विकराल हो रहा है. मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात और उससे भारत पर हो रहे असर पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में जानकारी दी. उन्होने कहा कि मध्य-पूर्व का संकट तीन हफ्ते से अधिक समय से जारी है और इसका प्रतिकूल असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर हो रहा है.
इस युद्ध के कारण भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी हो गयी है. यह चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय भी है. युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते हैं. खासकर कच्चे तेल और गैस की अधिकांश जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी होती है. साथ ही खाड़ी देश में एक करोड़ भारतीय काम करते हैं. समुद्र में चलने वाले व्यावसायिक वाहनों के अधिकांश क्रू सदस्य भी भारतीय है. ऐसे में भारत के लिए कई तरह की चुनौतियां है. इसके लिए युद्ध प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय मिशन के जरिये लोगों को हर संभव मदद देने का काम किया जा रहा है.
मिशन की ओर से समय-समय पर दिशानिर्देश जारी हो रहा है और प्रभावित देशों में 24/7 कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किया गया है. युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय स्वदेश आ चुके हैं. ईरान से लगभग 1000 भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं, जिसमें से 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं.
पेट्रोलियम और गैस की सप्लाई के लिए किए गए हैं उपाय
पीएम ने कहा, भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से आती हैं. युद्ध के जहाजों की आवाजाही बंद है. इसके बावजूद भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई काे सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए ताकि देश के आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े. देश अपनी जरूरत के 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है, इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने एलपीजी के घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के साथ ही एलपीजी के देश में ही उत्पादन को भी बढ़ाने का काम किया. पिछले एक दशक में उठाए गए कदम का सकारात्मक प्रभाव अब दिख रहा है. पहले कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी की जरूरत को पूरा करने के लिए 27 देशों से आयात होता था, अब भारत 41 देशों से आयात हो रहा है. संकट से बचने के लिए कच्चे तेल के भंडारण को बढ़ाया गया. मौजूदा समय में देश में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक का करने के लिए काम हो रहा है. सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर के साथ भी लगातार संपर्क में है.
आयात कम करने के लिए उठाए गए कदम का दिख रहा है असर
पिछले 10-11 साल में एथेनॉल का उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है. एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक-डेढ़ फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी और मौजूदा समय में यह बढ़कर 20 फीसदी हो गयी है. इसके कारण सालाना लगभग 4 करोड़ बैरल कम कच्चा तेल आयात करना पड़ रहा है. रेलवे के बिजलीकरण से भी बहुत बड़ा फायदा हो रहा है और इसके कारण हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की खपत कम हुई है. मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है. वर्ष 2014 में देश में मेट्रो नेटवर्क 250 किलोमीटर से भी काम था, जो अब बढ़कर लगभग 1100 किलोमीटर हो गया है. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर दिया जा रहा है. केंद्र सरकार ने राज्यों को 15000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए मुहैया करायी है. जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा. ऊर्जा इकोनॉमी की रीढ़ है और ग्लोबल ऊर्जा जरूरत को पूरा करने वाले एक बड़ा सोर्स पश्चिम एशिया है. मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण भारत पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति पर एक साथ काम काम कर रही है. सरकार ने एक इंटर मिनिस्टीरियल ग्रुप भी बनाया है और ग्रुप की रोजाना बैठक होती है. यह ग्रुप आयात-निर्यात में आने वाली हर समस्या का आकलन करता है.
देश में उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त
युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा? देश के किसानों के कारण अन्न के भंडार भरे हुए हैं. खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके इसके लिए सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है. कोरोना और उस समय को युद्धों के कारण उस दौरान भी ग्लोबल सप्लाई चैन में बाधा आयी थी. दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत 3000 रुपये हो गयी थी, लेकिन भारत में किसानों को यह 300 रुपये में मुहैया कराया गया. किसानों को उर्वरक की समस्या से निजात दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए है. पिछले एक दशक में देश में 6 यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, इससे सालाना 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक की यूरिया का उत्पादन हो रहा है. इस दौरान डीएपी और एनपीकेएस जैसे खाद का घरेलू उत्पादन भी लगभग 50 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है.
सरकार ने देश के किसानों को मेड इन इंडिया नैनो यूरिया का विकल्प भी दिया है. सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है. पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को 22 लाख से अधिक सोलर पंप दिए गए हैं, इससे भी डीजल पर उनकी निर्भरता कम हुई है. संकट के इस दौर में भी किसानों के लिए उर्वरक की कमी नहीं होगी. सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है.
संघर्ष सिर्फ भारत नहीं दुनिया के लिए चिंता का विषय
भारत सरकार इस संघर्ष को लेकर चिंता जाहिर कर चुकी है. भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है. कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है. भारत कूटनीति के जरिए युद्ध के माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है. बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है. युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है, इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है. ऐसे संकट जब आते हैं, तो कुछ तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश भी करते हैं. इसलिए कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. कोस्टल सिक्योरिटी, बॉर्डर सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी,, स्ट्रैटेजिक इंस्टॉलेशन सब की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है. इस युद्ध का प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है, इसलिए पहले से तैयार और एकजुट रहना होगा. जैसे कोरोना के समय एकजुटता से चुनौतियों का सामना किया था, उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है. हालात का फायदा उठाने वाले झूठ फैलाने का प्रयास करेंगे, ऐसे लोगों की कोशिशें को सफल नहीं होने देना है. काला बाजारी करने वाले, जमाखोरी करने के खिलाफ त्वरित कार्यवाही जरूरी है.
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