मणिपुर वीडियो मामला: सीबीआई जांच नहीं चाहती महिलाएं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक सिस्टम बनाने की जरूरत

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

सरकर का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा जबकि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल दोनों पीड़ित महिलाओं की तरफ से कोर्ट में उपस्थित हुए. उन्होंने कोर्ट में कहा कि दोनों पीड़ित महिलाएं केस की सीबीआई जांच और केस को असम ट्रांसफर करने के खिलाफ हैं.

विज्ञापन

मणिपुर वीडियो मामले पर टिप्पणी करते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सच है कि मणिपुर में हुई हिंसा का वीडियो सामने आया है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह एकमात्र घटना नहीं है जहां महिलाओं के साथ हिंसा हुई और उनका उत्पीड़न हुआ है. महिला उत्पीड़न की कई एेसी घटनाएं भी हमारे समाज में होती हैं जो सामने नहीं आ पाती हैं. इसलिए जरूरत इस बात की है कि हम महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को व्यापकता में देखें और एक एेसा तंत्र विकसित करें जो इस तरह के मामलों पर नजर रखे.

सीबीआई जांच नहीं चाहती महिलाएं

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने आज यह टिप्पणी मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाने संबंधी मामले की सुनवाई करते हुए की. ज्ञात हो कि आज मणिपुर वीडियो मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस सुनवाई के दौरान सरकर का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा जबकि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल दोनों पीड़ित महिलाओं की तरफ से कोर्ट में उपस्थित हुए. उन्होंने कोर्ट में कहा कि दोनों पीड़ित महिलाएं केस की सीबीआई जांच और केस को असम ट्रांसफर करने के खिलाफ हैं. इसपर केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने कभी भी केस को असम स्थानांतरित करने का जिक्र नहीं किया, सिर्फ यह कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई मणिपुर से बाहर हो.


महिलाओं का भरोसा टूटा

कोर्ट में दोनों पीड़ित महिलाओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पुलिस उन लोगों के साथ मिलकर काम कर रही थी जिन्होंने दोनों महिलाओं के खिलाफ हिंसा की और पुलिस ने इन महिलाओं को भीड़ के पास ले जाकर छोड़ दिया और भीड़ ने वही किया जो सबको पता है. कपिल सिब्बल ने कहा कि पीड़िताओं में से एक के भाई और की पिता मारे जा चुके हैं. लेकिन उनका शव अबतक नहीं मिला है. कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद 18 मई को जीरो एफआईआर दर्ज हुआ. एेसे में कैसे भरोसा किया जाये? इसलिए हमारी यह मांग है कि एेसे तंत्र की व्यवस्था कि जाये, जो निष्पक्ष होकर मामले की जांच करे.

सुप्रीम कोर्ट कर सकता है निगरानी

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह दोनों पक्षों को संक्षेप में सुनेगा और फिर कार्रवाई के सही तरीके पर फैसला करेगा. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट मामले की निगरानी करेगा तो केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है. वहीं मणिपुर वायरल वीडियो मामले पर बयान देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि जहां तक ​​कानून का सवाल है, बलात्कार पीड़िताएं इस बारे में बात नहीं करतीं. वे सामने आकर अपने दर्द को साझा नहीं करना चाहती हैं. ऐसे में सबसे जरूरी है कि उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करना. सीबीआई अगर मामले की जांच करती है, तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि महिलाएं सामने आयेंगी और सबकुछ बतायेंगी. अगर जांच में महिलाएं शामिल हों तो पीड़िताओं को बात करने में आसानी होगी और वे अपनी बात कह पायेगी. इसलिए मेरी राय है कि मणिपुर वीडियो मामले की जांच एक ऐसी समिति को सौंपी जाये, जिसके पास हाई पावर हो और पीड़ितों से बात करने का अनुभव भी हो.

सुप्रीम कोर्ट ने की थी घटना पर सख्त टिप्पणी

ज्ञात हो कि 19 जुलाई को मणिपुर में हुई हैवानियत का वीडियो सामने आया था जिसके बाद 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी वह इस घटना से बहुत दुखी है और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य घटना करार दिया था. कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में यह कहा था कि अगर इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है तो कोर्ट करेगा. कोर्ट ने यह कहा था कि हिंसा के लिए महिलाओं का इस्तेमाल सभ्य समाज में कतई स्वीकार्य नहीं है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने वीडियो पर संज्ञान लेने के बाद केंद्र और मणिपुर सरकार को निर्देश दिया था कि वे इस मामले पर कार्रवाई करें और रिपोर्ट कोर्ट को सौंपें. जिसके बाद 27 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गयी कि मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाने के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी है. साथ ही कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि वह महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह के अपराध के खिलाफ जीरी टालरेंस की नीति रखती है.

क्या है मामला

गौरतलब है कि मणिपुर में तीन मई को मैतेई समुदाय के अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के खिलाफ ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ का आयोजन किया गया था, जिसके बाद मणिपुर में हिंसा भड़क उठी. इस हिंसा में अबतक 160 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. इसी हिंसा के बाद कुकी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर घुमाया गया और उनके साथ छेड़खानी की गयी. इस घटना का वीडियो 19 जुलाई को वायरल हुआ, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है और संसद का मानसून सत्र बाधित है. मणिपुर मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ 7-8 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा भी होने वाली है.

Also Read: Breaking News Live: थोड़ी देर में लोकसभा में पेश हो सकता है दिल्ली अध्यादेश, हंगामे के कारण राज्यसभा स्थगित

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola