Maharashtra Civic Election: महाराष्ट्र में महानगरपालिकाओं के आगामी चुनावों को लेकर टिकट के दावेदारों ने हदें पार कर दीं हैं. टिकट पाने को बेताब दावेदारों और उनके समर्थक अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात देने के लिए चोरी से लेकर, कागजात निगलने या पुराने बयानों को तूल देने जैसे तमाम हथकंडे अपना रहे हैं. उनका एकमात्र ध्यान फॉर्म ‘ए’ और ‘बी’ पर था जो आवश्यक दस्तावेज हैं जिनके माध्यम से कोई राजनीतिक दल चुनावों में किसी उम्मीदवार को अपना उम्मीदवार घोषित करता है.
फॉर्म को फाड़कर निगल लिया?
शिवसेना के उद्धव कांबले गलत कारणों से तब चर्चा में आ गए, जब उन्होंने पुणे में अपनी ही पार्टी के एक प्रतिद्वंद्वी के एबी फॉर्म को कथित तौर पर फाड़कर निगल लिया. भारतीय जनता पार्टी ने जब शिल्पा दत्ता केलुस्कर से मुंबई के सायन इलाके में जारी किया गया एबी फॉर्म लौटाने को कहा, तो उन्होंने इसे ईमानदारी से लौटा दिया. हालांकि, भाजपा-शिवसेना गठबंधन की आधिकारिक उम्मीदवार को उस समय हैरानी हुई जब उन्हें पता चला कि केलुस्कर ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. बीजेपी ने उन पर पार्टी कार्यालय से फॉर्म चुराने का आरोप लगाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
फॉर्म छीनने का किया गया प्रयास!
नासिक में नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन (30 दिसंबर) अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल रहा. सूत्रों के मुताबिक, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि खत्म होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नामांकन फॉर्म ले जा रही एक कार का पीछा किया. पार्टी कार्यकर्ताओं ने उस बंगले में भी जबरदस्ती घुसने की कोशिश की जहां नामांकन फॉर्म बांटे जा रहे थे. कुछ कार्यकर्ताओं ने तो फॉर्म छीनने का भी प्रयास किया. पुणे में पूजा मोरे-जाधव के पुराने बयान फिर से उनके लिए मुसीबत बन गए. उनके प्रतिद्वंद्वियों ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी पत्नी के खिलाफ पूजा की निजी टिप्पणियां दिखाते हुए पुराने वीडियो सामने ला दिए. पूजा ने दावा किया कि ये टिप्पणियां किसी और लड़की ने की थी, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी.
नाम बदलने का आरोप
चंद्रपुर के बीजेपी अध्यक्ष सुभाष कासंगोत्तुवार पर प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की ओर से हस्ताक्षरित एक दस्तावेज में कुछ नामांकित व्यक्तियों के नाम बदलने का आरोप लगा. पार्टी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि (दो जनवरी) को मची अफरा-तफरी के बीच, नागपुर में एक उम्मीदवार के समर्थकों ने उसे उसके घर में बंद कर दिया ताकि वह अपना नामांकन पत्र वापस न ले सके. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ही उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया. राज्य में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी. (भाषा इनपुट)
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