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Land for Job Scam: जमीन के बदले नौकरी मामले में एफआईआर रद्द करने को लेकर लालू पहुंचे हाईकोर्ट

Updated at : 29 May 2025 6:45 PM (IST)
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Land for Job Scam: जमीन के बदले नौकरी मामले में एफआईआर रद्द करने को लेकर लालू पहुंचे हाईकोर्ट

जमीन के बदले नौकरी मामले में विशेष अदालत द्वारा आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के फैसले के खिलाफ पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है. याचिका में उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग की गयी है. याचिका में कहा गया है कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17(ए) की धारा के तहत लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी लेना आवश्यक है, लेकिन सीबीआई ने ऐसा नहीं किया.

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Land for Job Scam: पूर्व रेल मंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव जमीन के बदले नौकरी मामले में विशेष अदालत द्वारा आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है. याचिका में उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग की गयी है. न्यायाधीश रविंद्र डुडेजा ने लालू यादव की याचिका पर गुरुवार को संक्षिप्त सुनवाई की. यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई ने पूर्व रेल मंत्री के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले आवश्यक मंजूरी नहीं ली. जबकि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17(ए) की धारा के तहत लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी लेना आवश्यक है.

इसपर न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के समय विशेष न्यायाधीश के समक्ष उठाया जाना चाहिए था. इसपर सिब्बल ने कहा कि विशेष न्यायाधीश पहले ही आरोपपत्र पर संज्ञान ले चुका था, ऐसे में इस बात को उठाने पर भी अदालत अपना मत नहीं बदलती. जब आरोपपत्र पर अदालत संज्ञान ले चुकी है तो आरोपी आखिर कहां जाए. इस पर न्यायाधीश ने कहा कि आरोपपत्र पर बहस के दौरान भी इस मामले को उठाया जा सकता है. आखिर आप इस विकल्प का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहते हैं. सिब्बल ने कहा कि आरोपी को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट का रुख करने का अधिकार है. 


सीबीआई ने कहा लालू प्रसाद ने किया पद का दुरुपयोग

सीबीआई की ओर पेश वकील ने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री के तौर पर पद का दुरुपयोग किया. ऐसे में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 19 का इस्तेमाल किया गया. इस कानून की धारा 17 ए के तहत पुलिस बिना मंजूरी के किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच नहीं कर सकती है. लेकिन लालू यादव में मामले में इसकी जरूरत नहीं थी. लालू यादव के रेल मंत्री के दौरान उनके करीबियों ने अधिकारियों को कुछ खास लोगों को नौकरी देने को कहा. इसके एवज में पूर्व रेल मंत्री के परिवार के सदस्यों के नाम जमीन हासिल की गयी.

इस मामले में रेल मंत्री रहते पद का दुरुपयोग किया गया और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 19 लगायी गयी. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत बाद में आदेश देने का निर्णय लिया. वहीं आईआरसीटीसी घोटाले में गुरुवार को विशेष अदालत में भी सुनवाई हुई. इस मामले में विशेष अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने का फैसला सुरक्षित रख लिया. अब इस मामले की सुनवाई 23 जुलाई को होगी. 

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Vinay Tiwari

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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