कर्नाटक चुनाव: हिजाब मामला कितना बड़ा मुद्दा ? ‘पोस्टर ब्वॉय’ का हाल जानें

कर्नाटक में हिजाब पहनी कई छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश करने देने से इनकार किये जाने के बाद यह आदेश जारी किया गया था. जानें मामले का कर्नाटक चुनाव में कितना असर पड़ने की संभावना है.
कर्नाटक चुनाव में कई ऐसे मुद्दे हैं जो सुनाई दे रहे हैं. इस बीच सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि हिजाब मुद्दा चुनाव में कितना असर डालेगा. हालांकि शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का विवादास्पद मुद्दा कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक गंभीर मुद्दा होता नजर नहीं आ रहा है. यदि आपको याद हो तो उडुपी में एक गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनकर आने पर पाबंदी लगाये जाने के बाद पिछले साल यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छा गया था. पूरे देश में यह मामला छा गया था और लगातार प्रतिक्रिया आ रही थी.
कर्नाटक में भाजपा की सरकार ने विवाद के तूल पकड़ने के बाद शैक्षणिक परिसरों के अंदर हिजाब पहन कर आने पर पिछले साल एक आदेश के तहत बैन लगा दिया था. इसने कहा था कि समानता, अखंडता और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी पोशाक को अनुमति नहीं दी जा सकती है. विद्यार्थियों को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों और स्कूलों के लिए निर्धारित पोशाक ही पहनने का निर्देश दिया गया था.
कर्नाटक में हिजाब पहनी कई छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश करने देने से इनकार किये जाने के बाद यह आदेश जारी किया गया था. इस कदम के बाद देशभर में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हुए थे और राजनेताओं की प्रतिक्रिया सामने आयी थी. विपक्ष ने मामले को लेकर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला किया था. कुछ मुस्लिम छात्राओं के कोर्ट का रुख करने के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश को कायम रखा था. इसके बाद, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी, जिसने अक्टूबर में एक विभाजित फैसला सुनाया. विषय की सुनवाई आगे एक वृहद पीठ द्वारा की जाएगी.
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उल्लखनीय है कि हिजाब विवाद के दौरान भाजपा के ‘पोस्टर ब्वॉय’ रहे यशपाल सुवर्णा अब उडुपी विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार हैं. जब यह विवाद उत्पन्न हुआ था उस वक्त वह उडुपी गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज फॉर वुमन की विकास समिति के उपाध्यक्ष थे. मौजूदा विधायक रघुपति भट की जगह इस सीट से पार्टी ने सुवर्णा को टिकट दिया है, जो मोगावीरा (मछुआरा समुदाय) के नेता हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं पर उनकी मजबूत पकड़ है. सुवर्णा ने कहा कि विवाद ‘राष्ट्र विरोधी और असामाजिक तत्वों’ द्वारा पैदा किया गया, जो नहीं चाहते कि मुस्लिम लड़कियां या गरीब हिंदू विद्यार्थी शिक्षित हों.
भा इनपुट इके साथ
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