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नेपाल : अन्नपूर्णा चोटी से सुरक्षित बचाई गईं भारत की बलजीत कौर, उत्तरी आयलैंड की पर्वतारोही नोएल हन्ना की मौत

Updated at : 18 Apr 2023 8:24 PM (IST)
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नेपाल : अन्नपूर्णा चोटी से सुरक्षित बचाई गईं भारत की बलजीत कौर, उत्तरी आयलैंड की पर्वतारोही नोएल हन्ना की मौत

दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी अन्नपूर्णा से उतरते समय उत्तरी आयरलैंड की पर्वतारोही नोएल हन्ना की मौत हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोएल हन्ना भी उसी अन्नपूर्णा चोटी से उतरते समय लापता हो गई थीं.

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काठमांडू/नई दिल्ली : भारत की प्रमुख महिला पर्वतारोही बलजीत कौर (27) के नेपाल में अन्नपूर्णा चोटी से उतरते समय ‘चौथे शिविर’ के पास से लापता होने के एक दिन बाद मंगलवार को सुरक्षित बचा लिया गया. वहीं, उत्तरी आयरलैंड की पर्वतारोही नोएल हन्ना की मौत हो गई. सोमवार को नेपाल स्थित हिमालय की अन्नपूर्णा चोटी से उतरते समय ये दोनों पर्वतारोही लापता हो गई थीं.

दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ीं थीं बलजीत कौर

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘पायनियर एडवेंचर’ के अध्यक्ष पसंग शेरपा ने ‘हिमालयन टाइम्स’ को बताया कि बलजीत कौर ने दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ी थीं. वह सोमवार को जरूरी ऑक्सीजन के बिना चढ़ाई कर रही थी. उसे हवाई खोजी दल ने चौथे शिविर के पास 7,363 मीटर की ऊंचाई पर देखा था. शेरपा ने कहा कि वह शीतदंश से पीड़ित हैं और अब उसे काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीआईडब्ल्यूईसी अस्पताल ले जाया जा रहा है. शेरपा के मुताबिक, हवाई खोज दल ने कौर को कैंप की ओर अकेले उतरते देखा था.

माउंट एवरेस्ट पर 10 बार चढ़ चुकी हैं नोएल हन्ना

उधर, समाचार एजेंसी रॉयटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची चोटी अन्नपूर्णा से उतरते समय उत्तरी आयरलैंड की पर्वतारोही नोएल हन्ना की मौत हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोएल हन्ना भी उसी अन्नपूर्णा चोटी से उतरते समय लापता हो गई थीं, जैसे भारतीय पर्वतारोही बलजीत कौर का कोई पता नहीं चल पा रहा था. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोएल हन्ना करीब 10 बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुकी हैं. उन्होंने सोमवार को पश्चिमी नेपाल स्थित करीब 8,091 मीटर (26,545 फीट) ऊंची अन्नपूर्णा चोटी को फतह किया. अन्नपूर्णा चोटी से उतरने के बाद कैंप-IV में सोमवार और मंगलवार की दम्यानी रात को उनकी मौत हो गई.

बलजीत कौर को खोजने में तीन हेलीकॉप्टर तैनात

वहीं, एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पर्वतारोही बलजीत कौर अन्नपूर्णा चोटी की चढ़ाई पूरी करने के बाद टॉप प्वाइंट के नीचे अकेली रह गई थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार सुबह तक वह रेडियो संपर्क से बाहर थीं. मंगलवार की सुबह जब एक हवाई खोज अभियान शुरू हुआ, तब वह ‘तत्काल मदद’ के लिए एक रेडियो सिग्नल भेजने में कामयाब रहीं. शेरपा के अनुसार, बलजीत कौर की जीपीएस लोकेशन ने 7,375 मीटर (24,193 फुट) की ऊंचाई का संकेत दिया था. वह सोमवार शाम करीब सवा पांच बजे दो शेरपा गाइड के साथ अन्नपूर्णा चोटी पर पहुंची थीं. उन्हें ढूंढने के लिए कम से कम तीन हेलीकॉप्टरों को लगाया गया था. पिछले साल मई में हिमाचल प्रदेश की बलजीत कौर ने ‘माउंट ल्होत्से’ को फतह किया और एक ही मौसम में 8000 मीटर ऊंची चार चोटियों पर चढ़ने वाली वह पहली भारतीय पर्वतारोही बनीं.

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राजस्थान के अनुराग मालू की भी मौत

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के किशनगढ़ निवासी अनुराग मालू भी सोमवार को अन्नपूर्णा चोटी के तीसरे शिविर से उतरते समय लापता हो गए थे. इसके बाद नेपाली समाचार पत्र ‘द हिमालयन टाइम्स’ ने बताया कि सोमवार को 6000 मीटर की ऊंचाई से हिम दरार में गिरने से अनुराग मालू की मौत हो गई. ‘सेवन समिट ट्रेक्स’ के अध्यक्ष मिंगमा शेरपा ने बताया कि सर्दियों के मौसम में ‘के-2’ के शिखर पर पहुंचने वाले आयरलैंड के पहले व्यक्ति नोएल हन्ना ने कल रात ‘चौथे शिविर’ में अंतिम सांस ली. आयोजकों ने कहा कि मालू और हन्ना के शव को आधार शिविर वापस लाने के प्रयास जारी हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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