भारत के विभाजन से जुड़ी विरासत को सहेजने का जिम्मा कोवेंट्री यूनिवर्सिटी ने उठाया, 20 हजार से दस्तावेजों का होगा डिजिटलीकरण

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India Partition Heritage :भारत के इतिहास को सहेजने की इस कोशिश के विरासतों को मुंबई के हैमिल्टन स्टूडियो में रखा गया है. भारतीय इतिहास के लगभग 100 वर्षों तक के विरासत से जुड़ी 600,000 से अधिक वस्तुएं यहां रखी गई हैं.

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India Partition Heritage : भारत का विभाजन इतिहास की बहुत बड़ी घटना है और इस विभाजन के बाद के विरासतों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने का जिम्मा यूके के प्रसिद्ध कोवेंट्री यूनिवर्सिटी ने उठाया है. वह इन विरासतों को संरक्षित करने की परियोजना का नेतृत्व कर रहा है. इस परियोजना के तहत भारत के विभाजन के बाद के दो दशकों की 20,000 से अधिक तस्वीरों,प्रिंट और दस्तावेजों को शोध के जरिए डिजिटल माध्यम में लाया जाएगा. इन नए शोध का नेतृत्व कोवेंट्री यूनिवर्सिटी कर रहा है.


भारत के इतिहास को सहेजने की इस कोशिश के विरासतों को मुंबई के हैमिल्टन स्टूडियो में रखा गया है. भारतीय इतिहास के लगभग 100 वर्षों तक के विरासत से जुड़ी 600,000 से अधिक वस्तुएं यहां रखी गई हैं. इतिहास की जिस अवधि पर खास फोकस किया गया है वह 1947 से 1967 के बीच की अवधि है. यह समय विभाजन के बाद का काफी महत्वपूर्ण समय था. विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की ऐसी घटना है, जिसने इस क्षेत्र के भूगोल को बदल दिया और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अंत के साथ ही दो देशों का भी जन्म हुआ-भारत और पाकिस्तान.

भारत की सांस्कृतिक विरासत


कोवेंट्री यूनिवर्सिटी के रिसर्च सेंटर फॉर क्रिएटिव इकोनॉमीज, डिजिटल हेरिटेज एंड कल्चर के एसोसिएट प्रोफेसर बेन काइन्सवुड इस ऐतिहासिक घटना का डिजिटलीकरण करने के लिए हैमिल्टन स्टूडियो और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डिजाइन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हैमिल्टन स्टूडियो की स्थापना मुंबई में की गई है. यह स्टूडियो कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय लॉस एंजिल्स द्वारा वित पोषित है, जिसका उद्देश्य लाइब्रेरी लुप्तप्राय अभिलेखागार को नए तरीके से संरक्षित करना है. इस परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक विभाजनों को भरना सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देना और यह बताना है कि विभाजन कैसे भारत और इसके लोगों की कहानियों को आकार दे रहा है. इस परियोजना में कई पुरानी तस्वीरों के संरक्षित किया गया है. इस डिजिटलीकरन के जरिए उस युग को जिंदा करने की कोशिशकी गई है.


परियोजना के हेड बेन काइन्सवुड ने बताया कि कोवेंट्री यूनिवर्सिटी भारत की सांस्कृतिक कहानियों को संरक्षित करने का काम कर रहा है साथ ही उसका डिजिटलीकरण करके उसे शेयर भी कर रहा है, ताकि लोगों को उसके बारे मेंजानकारी मिले. मेरी यह कोशिश है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो और उसका विस्तार भी किया जा सके. यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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