सरायकेला के शीशी गांव में जंगली हाथी का उत्पात, लौकी की फसल रौंदी
लौकी की फसल को नष्ट करता जंगली हाथी. प्रतीकात्मक फोटो.
Seraikela News: सरायकेला-खरसावां के कुकड़ू प्रखंड स्थित शीशी गांव में जंगली हाथी ने देर रात खेतों में घुसकर लौकी की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया. किसानों ने मुआवजे की मांग की है. ग्रामीणों ने हाथी को खदेड़ दिया, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती हाथियों की आवाजाही को लेकर चिंता जताई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
चांडिल से हिमांशु गोप की रिपोर्ट
Seraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत शीशी गांव में मंगलवार देर रात एक जंगली हाथी के उत्पात से ग्रामीणों में दहशत फैल गई. हाथी जंगल से निकलकर गांव के समीप स्थित कृषि क्षेत्रों में पहुंच गया, जहां उसने किसानों की तैयार लौकी की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया. रात के अंधेरे में हाथी के खेतों में पहुंचने से आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
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लौकी की फसल को बनाया आहार
ग्रामीणों के अनुसार हाथी खेतों में घुसते ही लौकी की फसल खाने लगा. इस दौरान उसने बड़ी मात्रा में फसल को अपना आहार बनाया. इतना ही नहीं, खेतों में घूमने के दौरान उसने कई जगहों पर फसलों को रौंद भी दिया. किसानों का कहना है कि जिस फसल को तैयार करने में उन्होंने महीनों मेहनत की थी, वह एक ही रात में बर्बाद हो गई. हाथी के कारण कई किसानों के खेतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और फसल नुकसान से उनकी चिंता बढ़ गई है.
ग्रामीणों ने मिलकर हाथी को खदेड़ा
हाथी के गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही ग्रामीण एकजुट हो गए. लोगों ने पटाखे, मशाल, टॉर्च और शोरगुल का सहारा लेकर हाथी को गांव से दूर भगाने का प्रयास शुरू किया. काफी देर तक ग्रामीणों और हाथी के बीच यह संघर्ष चलता रहा. लगातार प्रयासों के बाद ग्रामीण हाथी को गांव से निकालकर जंगल की ओर खदेड़ने में सफल रहे. हालांकि इस दौरान लोगों में भय का माहौल बना रहा और कई ग्रामीण पूरी रात जागकर स्थिति पर नजर रखते रहे.
सुबह खेतों की स्थिति देखकर निराश हुए किसान
बुधवार सुबह जब किसान अपने खेतों में पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर मायूस हो गए. खेतों में लगी लौकी की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिली. कई स्थानों पर फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी, जबकि अन्य हिस्सों में पौधे टूटे और रौंदे हुए मिले. किसानों ने बताया कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित सहायता नहीं मिली तो उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है.
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वन विभाग से मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग
पीड़ित किसानों ने वन विभाग से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है. वहीं ग्रामीणों ने क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हाथियों की आवाजाही पर चिंता जताई है. ग्रामीणों का कहना है कि कुकड़ू और आसपास के इलाकों में जंगली हाथियों का प्रवेश अब आम होता जा रहा है, जिससे जान-माल और फसलों को लगातार खतरा बना हुआ है. लोगों ने वन विभाग से निगरानी बढ़ाने, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
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