सरायकेला-खरसावां जिले में रफ्तार का कहर, 200 दिनों में 125 हादसे, 100 लोगों ने गंवाई जान

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19 केएसएन 3 : जगह जगह पर चाईबासा-सरायकेला-कांड्रा मुख्य का पिच उखड़ने से बाइक व गाड़ियों अनित्रित हो कर दुर्घटनाओं की शिकार हो रहे हैं  | Prabhat Khabar Network

चाईबासा-सरायकेला-कांड्रा मुख्य सड़क | Prabhat Khabar Network

सरायकेला-खरसावां जिले में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है. पिछले 200 दिनों में 125 हादसों में 100 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें युवा अधिक हैं. तेज रफ्तार, स्टंटबाजी और खराब सड़कों को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है.

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सरायकेला-खरसावां जिले में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और खराब सड़कें लोगों की जान ले रही हैं. इस साल पिछले 200 दिनों में जिले में 125 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 100 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें आधे से ज्यादा युवा शामिल हैं. यानी जिले में औसतन हर दो दिन में एक व्यक्ति सड़क हादसे में जान गंवा रहा है.

हर महीने औसतन 15 लोगों की मौत

जनवरी से जून तक जिले में 113 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई. वहीं 1 से 19 जुलाई के बीच 12 हादसों में 6 लोगों की जान चली गई. इस तरह हर महीने औसतन 15 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है. वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 27 प्रतिशत बढ़ी थी और इस साल भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है.

स्टंटबाजी और तेज रफ्तार बन रही हादसों की वजह

सड़क हादसों की एक बड़ी वजह युवाओं में स्टंटबाजी और रील बनाने का बढ़ता चलन भी है. शाम होते ही मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगी बाइक लेकर कई युवक सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं. इससे अपनी और दूसरों की जान खतरे में पड़ जाती है.

वहीं पुलिस की जांच अक्सर हेलमेट और वाहन के कागजात तक सीमित रह जाती है. तेज रफ्तार भारी वाहन, ओवरलोडिंग और अन्य गंभीर उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भी हादसे बढ़ रहे हैं.

खराब और अच्छी दोनों सड़कें बन रही हैं हादसों की वजह

जिले की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. सरायकेला-राजनगर, गिद्दीबेड़ा (कांड्रा)-चौका और खरसावां-रड़गांव सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं. कई स्थानों पर जलजमाव होने से वाहन चालक संतुलन खो देते हैं और हादसे हो जाते हैं. कांड्रा-सरायकेला-चाईबासा मार्ग पर भी सड़क की पिच उखड़ने से दुर्घटनाएं हो रही हैं. वहीं एनएच-33 पर चल रहे मरम्मत कार्य से भी खतरा बढ़ा है.

दूसरी ओर, चाईबासा-राजनगर-हाता जैसी अच्छी सड़कों पर वाहन चालक तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हैं, जिससे वहां भी लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं.

जिले में 20 ब्लैक स्पॉट चिह्नित

प्रशासन ने जिले में 20 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं, जहां सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं. इनमें सरायकेला-आदित्यपुर मार्ग, चाईबासा मार्ग, कांड्रा-चौका मार्ग, हाता-राजनगर-चाईबासा मार्ग तथा चांडिल के एनएच-33 और एनएच-32 शामिल हैं. राहत की बात यह है कि खरसावां-कुचाई क्षेत्र फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है, जहां जागरूकता और नियमित वाहन जांच के कारण दुर्घटनाएं कम हुई हैं.

हादसों के मुख्य कारण

  • जर्जर सड़कों के गड्ढे और स्लैग लदे वाहनों से उड़ने वाली धूल.
  • बिना हेलमेट वाहन चलाना, ट्रिपल राइडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाना.
  • नाबालिगों द्वारा ट्रैक्टर और भारी वाहन चलाना.
  • ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार.
  • अच्छी सड़क मिलते ही गति सीमा का पालन नहीं करना.

नौ वर्षों का रिकॉर्ड

वर्षदुर्घटनाएंमौतघायल
201818212187
2019226165118
202017112488
202118114584
2022215161118
2023209153126
202419817390
2025253220345
202612010075 (19 जुलाई तक)

2026 में महीने के अनुसार स्थिति

महीनादुर्घटनाएंमौतघायल
जनवरी201812
फरवरी15117
मार्च222012
अप्रैल201319
मई13104
जून232213
जुलाई (19 जुलाई तक)1268

उपायुक्त ने क्या कहा

उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने कहा कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग है. तेज रफ्तार के कारण वाहन पर नियंत्रण नहीं रहता और दुर्घटनाएं होती हैं. इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन नियमित वाहन जांच अभियान चला रहा है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि चांडिल के एनएच-32, एनएच-33 और चाईबासा-राजनगर-हाता मार्ग जैसे ब्लैक स्पॉट पर स्पीड ब्रेकर, स्ट्रीट लाइट, रिफ्लेक्टिव साइनेज और सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. एनएच-33 के तीन प्रमुख ब्लैक स्पॉट को सुधारने का प्रस्ताव भी भेजा गया है. जिला सड़क सुरक्षा समिति लगातार फील्ड विजिट कर कमियों को दूर करने का काम कर रही है.

उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और कार चलाते समय सीट बेल्ट का जरूर इस्तेमाल करें. निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें. इससे न सिर्फ अपनी, बल्कि दूसरों की जान भी सुरक्षित रहेगी.


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Sachindra Dash

लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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