ओवैसी का आरोप: SIR से 6.5 करोड़ नाम हटे, मुसलमान बने निशाना; घुसपैठियों पर प्रस्तावित समिति को लेकर भड़के

Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 03 Jun 2026 2:26 PM

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असदुद्दीन औवैसी. फोटो- ANI.

Asaduddin Owaisi SIR: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे.

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Asaduddin Owaisi SIR: एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि इस तरह की प्रक्रियाओं के जरिए ऐसे लोगों का एक स्थायी वर्ग तैयार किया जा सकता है, जिन्हें मतदान जैसे मूल लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित कर दिया जाए. बुधवार को उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में अपनी बातें साझा कीं.

पोस्ट में ओवैसी ने कहा कि पहले दस्तावेज आधारित एसआईआर प्रक्रिया के तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 6.5 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए. अब सरकार उन हटाए गए नामों का अध्ययन करने और कथित अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक स्थायी व्यवस्था विकसित करने के लिए एक समिति बनाना चाहती है.

उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर का इस्तेमाल ऐसे भारतीयों का एक स्थायी वर्ग तैयार करने के लिए किया जाएगा जिन्हें व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है. ओवैसी ने कहा कि मतदान का अधिकार गरीबों के लिए ताकतवर लोगों के खिलाफ सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार है. अगर यह अधिकार छिन जाता है, तो सरकार उनके साथ अपनी मर्जी के मुताबिक व्यवहार कर सकती है. पहले से ही ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि कुछ लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने इस संबंध में कोई आंकड़ा नहीं दिया.

मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होने का प्रमाण नहीं- ओवैसी

ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हट जाना अपने आप में उसकी नागरिकता समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया के तहत नाम हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है. उनके अनुसार, लगभग 27 लाख मामलों पर अभी भी फैसला होना बाकी है और कई लोग फॉर्म-6 के जरिए दोबारा मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

चुनाव आयोग पर पारदर्शिता को लेकर सवाल

ओवैसी ने चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने भी अब तक यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनमें कितने ऐसे थे जिन्हें विदेशी नागरिक मानकर सूची से बाहर किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या मुसलमानों, महिलाओं, गरीबों और प्रवासी समुदाय हैं.

जनसंख्या आंकड़ों का हवाला देकर पूछा सवाल

केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकारी आंकड़े खुद बताते हैं कि देश की जनसंख्या वृद्धि दर स्थिर हो रही है और कुल प्रजनन दर (टीएफआर) लगभग 2.0 तक पहुंच चुकी है. उन्होंने पूछा कि जब जनसंख्या से जुड़े संकेतक स्थिर हैं तो फिर ऐसी समितियों और प्रक्रियाओं की आवश्यकता क्यों पड़ रही है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य मुसलमानों के खिलाफ लगातार भय और संदेह का माहौल बनाया जा रहा है.

नीट और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को भी बनाया मुद्दा

केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि आम नागरिकों को लगातार अलग-अलग दस्तावेजी प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कभी KYC, कभी SIR, तो कभी किसी पोर्टल पर कोई दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया. लेकिन दूसरी ओर, यह एक साधारण परीक्षा तक सुचारु रूप से आयोजित नहीं कर पाती. आम नागरिकों की लगातार जांच-पड़ताल होती है, जबकि सरकार की जवाबदेही तय करने का अवसर नागरिकों को नहीं मिलता. परीक्षा को लेकर उनका इशारा नीट की ओर था.

मई में चुनाव आयोग ने शुरू किया था एसआईआर का तीसरा चरण

चुनाव आयोग ने 14 मई को 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की घोषणा की थी. इस अभियान के तहत 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं का रिकॉर्ड चरणबद्ध तरीके से सत्यापित किया जाना है. आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया जनगणना के दौरान चल रही हाउस लिस्टिंग के साथ ही में संचालित की जा रही है ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके.

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तेलंगाना और पंजाब के लिए तय किया गया कार्यक्रम

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार तेलंगाना और पंजाब में 1 अक्टूबर 2026 को पात्रता तिथि माना गया है. 15 जून से 24 जून 2026 तक प्रारंभिक तैयारी का कार्य किया जाएगा. इसके बाद 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन अभियान चलाया जाएगा.

31 जुलाई को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. इसके बाद 31 जुलाई से 30 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा. सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया 28 सितंबर तक चलेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 1 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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