India China Face off : 14 देशों से लगती है चीन की सीमा, 23 देशों की जमीन पर जताता है हक, जानें ये 10 खास बातें

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 21 Jun 2020 10:34 AM

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Galwan Valley: ADDS THE LOCATION DETAILS - This satellite photo provided by Planet Labs shows the Galwan Valley area in the Ladakh region near the Line of Actual Control between India and China Tuesday, June 16, 2020. A clash high in the Himalayas between the world’s two most populated countries claimed the lives of 20 Indian soldiers in a border region that the two nuclear armed neighbors have disputed for decades, Indian officials said Tuesday.AP/PTI Photo(AP17-06-2020_000020A)

India China Face off : पूर्वी लद्दाख (ladakh) में चीन और भारत के बीच तनाव जारी है. इस तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (donald trump) ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने की खातिर अमेरिका (america) दोनों देशों से बात कर रहा है. इस बीच आइए आपको चीन की भौगोलिक दशा के बारे में कुछ बात बताते हैं. दरअसल, चीन की सीमा भले ही 14 देशों से लगती हो, लेकिन वह कम से 23 देशों की जमीन या समुद्री सीमाओं पर दावा जताता है.

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India China Face off : पूर्वी लद्दाख (ladakh) में चीन और भारत के बीच तनाव जारी है. इस तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (donald trump) ने कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने की खातिर अमेरिका (america) दोनों देशों से बात कर रहा है. इस बीच आइए आपको चीन की भौगोलिक दशा के बारे में कुछ बात बताते हैं. दरअसल, चीन की सीमा भले ही 14 देशों से लगती हो, लेकिन वह कम से 23 देशों की जमीन या समुद्री सीमाओं पर दावा जताता है.

ला ट्रोबे यूनिवर्सिटी की एशिया सुरक्षा रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने जिस तरह अक्साइ-चिन को हड़पा और अब गलवान घाटी पर अपना कब्जा जमाने की नापाक कोशिश कर रहा है, वह उसके लिए नया नहीं है. चीन अब तक दूसरे देशों की 41 लाख वर्ग किमी भूमि कब्जे में ले चुका है यह मौजूदा चीन का 43% हिस्सा है. ड्रैगन ने पिछले छह-सात दशकों में अपने आकार को भी दोगुना कर लिया है.

भारत का 38 हजार वर्ग किमी चीन के कब्जे में

1. ईस्ट तुर्किस्तान : 16.55 लाख वर्ग किमी भूभाग पर चीन का कब्जा है.

2. तिब्बत : 12.3 लाख वर्ग किमी वाले देश पर चीन ने सात अक्तूबर, 1950 को कब्जा कर लिया था.

3. इनर मंगोलिया : 11.83 लाख वर्ग किमी भू-भाग वाले इनर मंगोलिया को चीन ने 1945 में हथिया लिया था.

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4. ताइवान : 35 हजार वर्ग किमी वाले समुद्रों से चारों ओर से घिरे ताइवान पर लंबे समय से चीन की नजर है.

5. हांगकांग : चीन ने 1997 में यहां कब्जा कर लिया. चीन का 50.5% विदेशी निवेश यहां से ही आता है.

6. मकाउ : 1999 में पुर्तगालियों ने चीन को मकाउ सौंप दिया था.

7. भारत : चीन का भारत के 38 हजार वर्ग किमी पर कब्जा है. 14,380 वर्ग किमी अक्साइ-चिन का व 5,180 वर्ग किमी पीओके का.

8. पूर्वी चीन सागर : यहां के 81 हजार वर्ग किमी के आठ द्वीपों पर चीन की नजर है. यहां जापान के साथ चीन का टेंशन चल रहा है.

9. रूस से सीमा विवाद : रूस से 52 हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर चीन का विवाद है. 1969 में चीन ने रूस पर हमला किया था, जिसमें उसे मुंह की खानी पड़ी थी.

10. दक्षिण चीन सागर : चीन इस क्षेत्र को सात देशों से हड़पने की कोशिश में है. 35.5 लाख वर्ग किमी में फैले क्षेत्र पर चीन दावा करता है.

Posted By: Amitabh Kumar

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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