ICMR की वेबसाइट सुरक्षित, सूत्रों का दावा- हैकर्स ने 6 हजार बार हैक करने का किया था प्रयास
Published by : Pritish Sahay Updated At : 06 Dec 2022 6:44 PM
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की साइट पर हैकर्स ने करीब 6 हजार से भी ज्यादा बार साइबर हमले की कोशिश की. हालांकि, आईसीएमआर का कहना है कि ICMR की वेबसाइट सुरक्षित है.
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वेबसाइट पर साइबर हैकर्स के हमले को लेकर आधिकारिक सूत्र का दावा है कि आईसीएमआर की वेबसाइट सुरक्षित है. साइट एनआईसी डेटा सेंटर में होस्ट की गई है, फायरवॉल एनआईसी से है और इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है. एनआईसी को साइबर हमले के बारे में ईमेल के माध्यम से सूचित किया गया था और उसने रिपोर्ट दी थी कि हमले को रोका गया था.
The ICMR website is safe. The site is hosted at NIC Data Centre, the firewall is from NIC and & is regularly updated. NIC was informed through email regarding a cyber attack & has reported that the attack was prevented. ICMR has found the website in the order: Official Sources pic.twitter.com/gp0A3w03e1
— ANI (@ANI) December 6, 2022
गौरतलब है कि साइबर हैकर्स ने आईसीएमआर की वेबसाइट को हैक करने का प्रयास किया. सूत्रों के मुताबिक, 30 नवंबर को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की साइट पर करीब 6 हजार से भी ज्यादा बार साइबर हमले की कोशिश की गई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईपी एड्रेस के आधार पर जांच की गई तो इसमें हांगकांग स्थित एक ब्लैक लिस्टेड आईपी से ट्रेस किया गया.
नाकाम हुए साइबर हैकर्स के मंसूबे: वहीं, आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि साइबर हमले के बाद हमलावरों को ब्लॉक कर दिया गया. इस कारण लगातार कोशिश के बाद भी वो अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके. वहीं, घटना के बाद आईसीएमआर की ओर से आई टीम को भी अलर्ट कर दिया गया.
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली एम्स पर भी साइबर अटैक किया गया था. हैकर्स ने दिल्ली एम्स का सर्वर हैक कर लिया था, जिस कारण अस्पताल के अधिकांश ऑनलाइन कामकाज ठप हो गया था. तीन-चार दिनों से ज्यादा अस्पताल का काम मैनुअल मोड किया गया था. हमले के बाद एम्स के अधिकांश सर्वरों ने काम करना बंद कर दिया था. यहां तक की राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) द्वारा प्रबंधित ई-हॉस्पिटल नेटवर्क भी. आपातकालीन, बहिरंग रोगी, अंतः रोगी और प्रयोगशाला विंग सहित सभी कार्यों को कंप्यूटर की जगह हाथों से करना पड़ा.
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By Pritish Sahay
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