मोदी सरनेम मामला: सजा पर रोक के बाद राहुल गांधी का ट्वीट- मेरा कर्तव्य वही रहेगा, भारत के विचार की रक्षा करना
राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाये जाने के बाद कांग्रेस की ओर से पहली प्रतिक्रिया आयी है -यह नफरत के खिलाफ मोहब्बत की जीत है. सत्यमेव जयते - जय हिंद. वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह बहुत बड़ी जीत है. आज बहुत खुशी का दिन है.
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट किया है-चाहे कुछ भी हो, मेरा कर्तव्य वही रहेगा. भारत के विचार की रक्षा करना. ज्ञात हो कि मोदी सरनेम मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की दलील सुनने के बाद सूरत सेशंस कोर्ट द्वारा दी गयी सजा पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि राहुल गांधी को अधिकतम सजा दी गयी, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं किया गया. उनका बयान अपमानजनक नहीं था. राहुल गांधी का कोर्ट में पक्ष रखते हुए उनके वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि पूर्णेश मोदी का मूल उपनाम मोदी नहीं है, वह मोढ़ वणिक समाज से आते हैं. उन्होंने मोदी सरनेम बहुत बाद में ग्रहण किया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाये जाने के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी संंसद के मानसून सत्र में हिस्सा लेंगे?
23 मार्च 2023 को सूरत सेशंस कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को दोषी करार दिया था. कोर्ट द्वारा दोषी करार देते ही राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गयी थी. उन्हें मानहानि के मामले में कोर्ट ने अधिकतम दो वर्ष की सजा सुनायी थी. इस सजा के बाद 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें लिखा गया था -श्री राहुल गांधी जो केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं उन्हें सूरत कोर्ट ने 2019 के एक मामले में दोषी करार दिया है, जिसके फलस्वरूप उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द की जाती है. उनकी सदस्यता उनके दोषी करार दिये जाने वाले दिन यानी 23 मार्च से ही रद्द की जाती है. राहुल गांधी पर यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 के तहत किया गया. अब चूंकि कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी है, इसलिए राहुल गांधी के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता खुद ब खुद बहाल हो गयी है.
यह नफरत के खिलाफ मोहब्बत की जीत है।
सत्यमेव जयते – जय हिंद 🇮🇳 pic.twitter.com/wSTVU8Bymn
— Congress (@INCIndia) August 4, 2023
राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाये जाने के बाद कांग्रेस की ओर से पहली प्रतिक्रिया यह आयी है कि यह नफरत के खिलाफ मोहब्बत की जीत है. सत्यमेव जयते – जय हिंद. वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह बहुत बड़ी जीत है. आज बहुत खुशी का दिन है. सोमवार को जैसे ही संसद का सत्र शुरू होगा मैं लोकसभा अध्यक्ष से यह कहूंगा कि उनकी सदस्यता बहाल करने को लेकर नोटिफिकेशन जारी करें.
#WATCH | "It's a happy day…I will write and speak to Lok Sabha Speaker today itself," says Congress MP Adhir Ranjan Chowdhury after Supreme Court stayed conviction of Rahul Gandhi in Modi surname remark case. pic.twitter.com/ePhhcuCqXW
— ANI (@ANI) August 4, 2023
राहुल गांधी के वकील अभिषेक सिंघवी ने जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस संजय कुमार की पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल कोई कुख्यात अपराधी नहीं है. बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ कई मामले दर्ज कराये हैं लेकिन उन्हें किसी भी मामले में कोई सजा नहीं हुई है. गौरतलब है कि सूरत सेशंस कोर्ट द्वारा दी गयी सजा पर गुजरात हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी. वहीं पूर्णेश गांधी की तरह से सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुए वकील ने कोर्ट में कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ ढेर सारे सबूत उपलब्ध हैं. आपराधिक मानहानि मामले में गुजरात के पूर्णेश मोदी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने न्यायालय से कहा कि राहुल गांधी को सजा से छूट नहीं दी जानी चाहिए.
ज्ञात हो कि 23 मार्च 2023 को सूरत सेशंस कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी और उन्हें जमानत देकर ऊपरी अदालत में अपील करने की इजाजत दी थी. पूर्णेश मोदी ने 13 अप्रैल 2019 में कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी सभा में मोदी उपनाम के संबंध में राहुल गांधी द्वारा की गयी विवादित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था.
उसके बाद 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें लिखा गया -श्री राहुल गांधी जो केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं उन्हें सूरत कोर्ट ने 2019 के एक मामले में दोषी करार दिया है, जिसके फलस्वरूप उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द की जाती है. उनकी सदस्यता उनके दोषी करार दिये जाने वाले दिन यानी 23 मार्च से ही रद्द की जाती है. राहुल गांधी पर यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 के तहत किया गया.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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