ePaper

GST: विपक्ष शासित राज्यों ने कहा, जीएसटी में होने वाले बदलाव से पहले राज्यों के हितों का ख्याल करे केंद्र

Updated at : 29 Aug 2025 7:55 PM (IST)
विज्ञापन
GST: विपक्ष शासित राज्यों ने कहा, जीएसटी में होने वाले बदलाव से पहले राज्यों के हितों का ख्याल करे केंद्र

विपक्ष शासित राज्यों को आशंका है कि केंद्र सरकार के जीएसटी दरों में होने वाले बदलाव से उसकी वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. विपक्ष शासित राज्यों का मानना है कि केंद्र सरकार ने राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय असर का आकलन किए बिना जीएसटी की दरों में व्यापक बदलाव लाने का फैसला लिया है.

विज्ञापन

GST: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जीएसटी की व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की घोषणा की थी. इस घोषणा के बाद जीएसटी के दरों में व्यापक बदलाव लाने की पहल शुरू की गयी. केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि जीएसटी दरों के चार स्लैब 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी की जगह सिर्फ दो स्लैब बनाना है. सरकार के इस फैसले से कई सामानों पर जीएसटी की दर कम होने से कीमतों में कमी आएगी, खपत बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है.

अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले से बाजार में आए नकारात्मक असर को कम करने में मदद मिलेगी. लेकिन कई विपक्ष शासित राज्यों को आशंका है कि केंद्र सरकार के जीएसटी दरों में होने वाले बदलाव से उसकी वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. विपक्ष शासित राज्यों का मानना है कि केंद्र सरकार ने राज्यों पर पड़ने वाले वित्तीय असर का आकलन किए बिना जीएसटी की दरों में व्यापक बदलाव लाने का फैसला लिया है.

इसे लेकर शुक्रवार को विपक्षी शासित राज्य झारखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पंजाब, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए वित्त, वाणिज्य एवं राजस्व मंत्रियों की बैठक दिल्ली के कर्नाटक भवन में हुई. इस बैठक में जीएसटी की दरों में होने वाले बदलाव के बाद राज्यों को होने वाले आर्थिक नुकसान पर विचार-विमर्श किया गया. 

राज्यों के आर्थिक हितों का ख्याल रखने की अपील

झारखंड एक छोटा मैन्युफैक्चरिंग राज्य है. जीएसटी प्रणाली के प्रणाली के क्रियान्वयन से इसके आंतरिक राजस्व संग्रहण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. राज्य कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट जैसे अन्य दूसरे खनिज के खनन में अग्रणी है. राज्य में उत्पादित खनिजों को दूसरे राज्यों में भेजा जाता है. अन्तर्राज्यीय आपूर्ति के तहत वैट के दौरान राज्य को सीएसटी के तौर पर राजस्व हासिल होता था. लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह राशि पूरी तरह खत्म हो गयी.  एक जुलाई 2017 को देश में जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को पांच साल तक राजस्व में होने वाले नुकसान के लिए राहत देने का प्रावधान किया गया. 

वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2022-23 (जून, 2022 तक) तक केंद्र सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता रहा है. लेकिन जीएसटी दरों में होने वाले व्यापक बदलाव करने के फैसले में राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान का आकलन नहीं किया गया है. ऐसे में झारखंड सरकार किसी भी बदलाव का तभी समर्थन करेगी, जब राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा. 


केंद्र के फैसले से झारखंड को हर साल 2 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की संभावना है. शुक्रवार को विपक्षी शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में तय किया गया कि जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक में एक संयुक्त मसौदा पेश किया जाएगा और राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई करने का भरोसा मिलने के बाद ही किसी बदलाव को मंजूरी दी जाएगी.  

विज्ञापन
Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola