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Final Year Exam 2020: अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित करने के लिए खोले जा सकते हैं कॉलेज, गृह मंत्रालय ने एससी में दायर किया हलफनामा

By Prabhat khabar Digital
Updated Date

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने कॉलेज और विश्वविद्यालयों को अंतिम अवधि की परीक्षाएं खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अपने अनलॉक -3 को दिशा-निर्देशों में, देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को 31 अगस्त, 2020 तक बंद रखने का आदेश दिया था.

यूजीसी के अनुसार निर्देश, कॉलेजों/ विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर, 2020 से पहले या तो ऑनलाइन, ऑफ़लाइन या सम्मिश्रण दोनों माध्यमों से परीक्षा आयोजित करवानी होगी. यूजीसी के दिशानिर्देशों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किए गए अनुरोधों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 10 (2)(1) के तहत जारी किए गए निर्देशों के अनुसार लिया गया है. यूजीसी के दिशानिर्देशों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. एक हलफनामे में, एमएचए ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि बड़ी संख्या में छात्रों की शैक्षणिक रुचि को देखते हुए अनलॉक 3.0 के दौरान शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है.

31 अगस्त तक बंद हैं सभी शिक्षण संस्थान

गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत को सूचित किया है कि जबकि अनलॉक -3 दिशानिर्देशों के तहत 31 अगस्त तक स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षिक और कोचिंग संस्थानों को बंद रखना जारी रखा गया है. ऐसे में भी यूजीसी के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में विश्वविद्यालयों / संस्थानों को फाइनल ईयर की परीक्षा कराने के लिए छूट दी गई है. शीर्ष अदालत ने यूजीसी को महाराष्ट्र और दिल्ली सरकारों द्वारा दायर हलफनामों का जवाब देने के लिए समय दिया, जिसमें उन्होंने प्रस्तुत किया कि वे परिपत्र के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में अंतिम अवधि की परीक्षा आयोजित नहीं करेंगे।

शीर्ष अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों की शैक्षणिक रुचि को देखते हुए निर्णय लिया गया था.यूजीसी (University Grants Commission) को फाइनल ईयर की परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर COVID-19 महामारी के मद्देनजर परीक्षाओं को रद्द करने के लिए छात्रों और अभिभावकों द्वारा दायर कई याचिकाओं के साथ शीर्ष अदालत में बहस की जा रही है.

यूजीसी ने भी शीर्ष अदालत में दायर किया था हलफनामा

आपको बता दें कि इससे पहले यूजीसी (University Grants Commission) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं के आयोजन की ज़िम्मेदारी यूजीसी लेता है, किसी भी राज्य की सरकार नहीं. यूजीसी ने अपने हलफनामे में फिर दोहराया है कि वह सितंबर तक परीक्षाओं के आयोजन के हक में हैं, जो कि छात्रों के भविष्य के हित के मद्देनज़र सही है.

छात्रों ने किया यूजीसी के निर्देश का विरोध

यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितंबर तक आयोजित करवाने का निर्देश दिया था, जिसका 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विरोध किया है, छात्रों की दलील है कि कोरोना संकट काल में हर जगह हर छात्र के लिए परीक्षाओं में शामिल हो पाना संभव नहीं है.

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