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दिल्ली की सीमाओं पर अब भी डटे हैं किसान यूनियन, हरियाणा के डिप्टी सीएम ने दोबारा वार्ता करने के लिए पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला.
हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला.
फाइल फोटो.

नई दिल्ली/चंडीगढ़ : केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान यूनियनों के नेता दिल्ली की सीमाओं पर अब भी डटे हुए हैं. दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर जारी है. इस महामारी के दौरान किसानों के आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उसका कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला. अब हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए चिट्ठी लिखी है.

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा है कि आंदोलनकारी किसानों से तीन-चार केंद्रीय मंत्रियों की समिति बनाकर दोबारा बातचीत शुरू की जाए. उन्होंने लिखा कि किसान का आंदोलन का लंबा खिंचना चिंता का विषय बना हुआ है. बातचीत से हर समस्या का हल निकालना संभव है. किसानों की मांगों पर सौहार्दपूर्ण समाधान होना चाहिए. उप-मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी को गेहूं खरीद को लेकर जानकारी भी दी है. उन्होंने लिखा है कि रबी की छह फसलों को हरियाणा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ही खरीदा जा रहा है.

गृह मंत्री अनिल विज ने भी लिखी है कृषि मंत्री को चिट्ठी

उप-मुख्यमंत्री के पहले हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को पत्र लिखकर कोरोना के मद्देनजर नए सिरेसे आंदोलनकारी किसानों से दोबारा बातचीत शुरू करने की बात कही थी. रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री को लिखे पत्र में विज ने लिखा था कि आंदोलन पर बैठे किसानों से एक बार फिर बातचीत शुरू की जाए. उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़े मामलों के बीच उन्हें किसानों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है. आंदोलन में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है.

अगस्त 2020 से आंदोलनरत हैं किसान

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर देश के किसान अगस्त 2020 से ही आंदोलनरत हैं. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की सीमाओं पर लंबे अरसे से डटे हुए हैं. इस दौरान किसानों ने 26 जनवरी 2021 को ट्रैक्टर रैली भी निकालकर सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया. हालांकि, इस रैली के दौरान हिंसा हो जाने की वजह से यह विवादों में भी घिर गया. इस बीच, किसानों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार और किसान यूनियनों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन वह भी बेनतीजा ही रही.

Posted by : Vishwat Sen

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