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Faiz-e-Elahi Masjid : 30 पत्थरबाजों की पहचान, समाजवादी पार्टी के सांसद पुलिस के निशाने पर

Faiz-e-Elahi Masjid : दिल्ली के तुर्कमान गेट में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद 18वीं सदी की ऐतिहासिक धरोहर है. मस्जिद और आसपास की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बवाल हुआ. इसके बाद पुलिस कार्रवाई कर रही है.

Faiz-e-Elahi Masjid : फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी के मामले में दिल्ली पुलिस ने 30 लोगों की पहचान की है. पुलिस ने यह पहचान सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर की है. आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं. पत्थरबाजी के मामले में दिल्ली पुलिस समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को जांच में शामिल होने के लिए समन भेजेगी. न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के अनुसार, हिंसा से पहले वह मौके पर मौजूद थे और वरिष्ठ अधिकारियों के बार-बार अनुरोध के बावजूद आसपास बने रहे.

इस बीच दिल्ली नगर निगम (एमसीडी)  द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तुर्कमान गेट स्थित फ़ैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. इस दौरान हुई पत्थरबाजी के मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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नहीं मिला स्वामित्व का दावा

एमसीडी ने कहा है कि उसने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण यह पता चलने के बाद हटाया कि वहां भूमि का एक छोटा सा हिस्सा ही 1940 के पट्टे के तहत था, जिसके अलावा अन्य जमीन में किसी का स्वामित्व नहीं पाया गया. निगम ने एक बयान में कहा कि 1940 के पट्टे के विलेख में केवल 0.195 एकड़ भूमि शामिल थी, जिसमें एक चबूतरे वाला टिन शेड, एक हुजरा (कमरा) और एक कब्रिस्तान स्थित था.

बयान में कहा गया कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद रामलीला मैदान में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया, जिसमें 36,000 वर्ग फुट से अधिक अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि को खाली कराया गया. नगर निगम ने कहा कि पट्टा विलेख के तहत आने वाली भूमि के अलावा जमीन पर अपना स्वामित्व न तो दिल्ली वक्फ बोर्ड प्रस्तुत कर सका और न ही सैयद फैज इलाही प्रबंधन समिति पेश कर सकी.

सर्वेक्षण में क्या पाया गया ?

सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 36,428 वर्ग फुट जमीन पर अतिक्रमण है, जिसमें एक बारातघर और एक निजी डायग्नोस्टिक केंद्र जैसी अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं. बयान के अनुसार, भारत सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) के तहत रामलीला ग्राउंड की लाइसेंसधारी एमसीडी ने एल एंड डीओ और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों के समन्वय से एक शिकायत के बाद संयुक्त सर्वेक्षण किया था. इसके बाद, अतिक्रमण हटाने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में रिट याचिका (सिविल) दायर की गई. न्यायालय ने 12 नवंबर 2025 के अपने आदेश में प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद एमसीडी को तीन महीने के भीतर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

Amitabh Kumar
Amitabh Kumar
डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. जर्नलिज्म की शुरूआत प्रभातखबर.कॉम से की. राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़. राजनीति,सामाजिक संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. ट्रेंडिंग खबरों पर फोकस.

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