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ईरान को साधने में जुटा भारत, रक्षा मंत्री के बाद अब विदेश मंत्री भी जयशंकर जाएंगे तेहरान, चीन को झटका लगना तय

By Prabhat khabar Digital
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 विदेश मंत्री एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर
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चीन के साथ चल रहे भारत के तनाव के बीच आज विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के लिए रवाना हो रहे हैं. यहां विदेश मंत्री चार दिन रहेंगे. इस दौरान वह मॉस्को में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेंगे. इस बैठक में शामिल हो कर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत लौट आए हैं. रूस से वापसी के दौरान वो ईरान चले गए थे और वहां अपने समकक्ष के संग बैठक की थी.

राजनाथ सिंह ने जब 5 सितंबर को ट्वीट करके बताया कि वो रूस से लौटते हुए ईरान जाएंगे तब ये कई लोगों के लिए हैरत भरा कदम था. ऐसा इसलिए क्योंकि राजनाथ सिंह का तीन दिवसीय रूस दौरा पहले से तय था लेकिन उनके ईरान रुकने के बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई जानकारी नहीं थी.

भारत-चीन सीमा तनाव और ईरान-चीन की बढ़ती नजदीकियों के बीच दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात ने इसलिए सुर्खियाँ भी बटोरी. पहली नजर में भले ही ये दो देशों के रक्षा मंत्रियों की सामान्य मुलाकात लगे लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखने वाले विश्लेषक इस मुलाकात के दूरगामी निष्कर्ष निकाल रहे हैं. अब विदेश मंत्री के तेहरान जाने की खबर से निश्चित तौर पर चीन परेशान होगा.

ऐसा माना जा रहा है कि विदेश मंत्री भी इस यात्रा के दौरान ईरान का भी रुख कर सकते हैं. द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिति की समीक्षा के लिए दोनों विदेश मंत्रियों से मंगलवार दोपहर को मिलने की उम्मीद है. हालांकि अभी तक विदेश मंत्रालय द्वारा इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी कर सकते हैं.इस बैठक में सीमा विवाद का मुद्दा उठ सकता है. जयशंकर मॉस्को में आयोजित आठ सदस्यीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने जा रहे हैं. भारत और चीन दोनों इसके सदस्य भी हैं.

चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मॉस्को में संभावित वार्ता से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ सीमा पर बनी स्थिति को पड़ोसी देश के साथ समग्र रिश्तों की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता. उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख के हालात बहुत गंभीर हैं.ऐसे हालात में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक स्तर पर ‘बहुत बहुत गहन विचार-विमर्श’ की जरूरत है. बता दें कि इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मॉस्को की यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था.

चीन को झटका

भारत के वरिष्ठ मंत्रियों का ईरान यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब चीन और ईरान व्यापार, राजनीति और सुरक्षा में 25 साल की रणनीतिक साझेदारी के लिए एक समझौते के करीब हैं. भारत भी चाबहार बंदरगाह में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए ईरान के साथ मिलकर काम करने का प्रयास कर रहा है. भारत के इस रूख से चीन परेशान है.

Posted By: Utpal kant

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