Delhi Blast News: दिल्ली ब्लास्ट मामले में डाॅक्टर्स के बाद अब मौलवी गिरफ्तार, अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर में था घर

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 12 Nov 2025 2:02 PM

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दिल्ली ब्लास्ट : लाल किला के इसी इलाके में हुआ बम विस्फोट

Delhi Red fort Blast : दिल्ली बम विस्फोट मामले में पुलिस ने अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर फरीदाबाद से एक मौलवी को गिरफ्तार किया है. इसी मौलवी के आवास से विस्फोटक की बरामदगी हुई है. मौलवी को पूछताछ के लिए श्रीनगर ले जाया गया है.

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Delhi Blast Latest News: दिल्ली ब्लास्ट मामले में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी की है. पुलिस ने हरियाणा के मेवात से एक मौलवी को हिरासत में लिया है. इस संबंध में पीटीआई न्यूज एंजेंसी ने जानकारी दी है. एजेंसी ने बताया है कि पुलिस अधिकारियों ने मौलवी इश्तियाक की गिरफ्तारी से संबंधित सूचना दी है. मौलवी को गिरफ्तार कर श्रीनगर ले जाया गया है.

अलफलाह विश्वविद्यालय परिसर में क्यों रहता था मौलवी?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार मौलवी फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर में ही एक किराए के मकान में रह रहा था. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने उसके घर से ही 2,500 किलोग्राम से अधिक अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर बरामद किया था. दिल्ली ब्लास्ट मामले में पुलिस ने अबतक नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. मौलवी इश्तियाक के आवास में विस्फोटक सामग्री डॉ मुजम्मिल गनई उर्फ ​​मुसैब और डॉ उमर नबी ने रखी थी. डॉ नबी ही वो शख्स है, जो ब्लास्ट कराने वाली कार को चला रहा था. इस विस्फोट में अबतक 12 लोगों के मारे जाने की सूचना है. मौलवी के आवास पर आतंकवादी माड्‌यूल के डाॅक्टर्स बैठक करते थे. उमर नबी हमेशा ही देशभर में ब्लास्ट करने की योजनाओं के बारे में बात करता था.

हाई अलर्ट पर दिल्ली पुलिस, छापेमारी जारी

दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए शक्तिशाली विस्फोट के बाद दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है. राजधानी में पुलिस बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रही है, ताकि कोई भी संदिग्ध मिले तो उसे गिरफ्तार करके सच्चाई का पता लगाया जाए. पुलिस इस कोशिश में भी है कि कहीं कोई दूसरी आतंकवादी घटना ना घटित हो.अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के सभी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.वाहनों की तलाशी ली जा रही है.एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि सभी जिला इकाइयों और विशेष शाखाओं को सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों विशेषकर पर्यटन स्थलों, मॉल और धार्मिक स्थलों के पास गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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