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Defense: रक्षा मंत्रालय ने 54 हजार करोड़ रुपये के रक्षा खरीद को दी मंजूरी

Updated at : 20 Mar 2025 6:20 PM (IST)
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Rajnath Singh

Rajnath Singh

रक्षा मंत्रालय ने टी-90 टैंक के लिए 1350 हॉर्स पावर वाले इंजन, नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो और वायुसेना के लिए अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम के खरीद को मंजूरी दी है. इस खरीद पर लगभग 54 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

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Defense: भारतीय सेना के तोपखाने की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से अहम फैसला लिया गया है. रक्षा मंत्रालय ने टी-90 टैंक के लिए 1350 हॉर्स पावर वाले इंजन, नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो और वायुसेना के लिए अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम के खरीद को मंजूरी दी है. इस खरीद पर लगभग 54 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में भारतीय सेना के लिए 307 एडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) खरीदने के लिए 7000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी.  इस खरीद के बाद भारतीय सेना के तोपखाने की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी. 


अब भारतीय सेना को टी-90 टैंक एक हजार हॉर्स पावर की बजाय 1350 हॉर्स पावर के मिलेंगे. हार्स पावर बढ़ने से टी-90 टैंक की मारक क्षमता ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफी बढ़ जायेगी. भारतीय सेना की टैंक यूनिट में टी-90 टैंक का अहम रोल है. रूस निर्मित टी-90 टैंक काे आधुनिक बनाने के लिए सेना की ओर से कई कदम उठाए गए हैं. अब इस टैंक के इंजन की क्षमता बढ़ने से टैंक की मारक क्षमता में इजाफा होना तय है. 


आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा


रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए स्वदेशी तकनीक से निर्मित एंटी सबमरीन टॉरपीडो वरुणास्त्र को मंजूरी दी है. इस टॉरपीडो का विकास नेवल साइंस एंड टेक्नॉजिकल लेबोरेटरी ने किया है. उनकी तैनाती से भारतीय नौसेना की ताकत दुश्मनों के सबमरीन खतरे के खिलाफ काफी बढ़ जाएगी. वहीं वायुसेना के लिए रक्षा मंत्रालय ने अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम को मंजूरी दी है. इस तकनीक के इस्तेमाल से वायुसेना की लड़ाकू क्षमता काफी बढ़ जाएगी. मौजूदा समय में वायुसेना अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम की कमी का सामना कर रही है. वायुसेना 12 अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया में हैं. इसमें डीआरडीओ द्वारा विकसित नेत्र सिस्टम भी शामिल है. 

रुस द्वारा मुहैया कराए गए सिस्टम पुराने हो चुके हैं. वायुसेना के पास इजरायली अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट सिस्टम मौजूद है, लेकिन यह जरूरतों के हिसाब से काफी कम है. गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय इस साल को रिफॉर्म साल के तौर पर मना रहा है. इसके तहत हथियारों की खरीद प्रक्रिया को आसान बनाया गया है ताकि तय समय में हथियारों की खरीद सुनिश्चित हो सके. 

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Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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