Coronavirus Pandemic के बारे में वह सबकुछ जो आपको जानना चाहिए

Jalandhar: A health worker wearing a protective suit uses a thermal screening device on vendors during a government-imposed nationwide lockdown as a preventive measure against the spread of coronavirus, in Jalandhar, Tuesday, April 14, 2020. (PTI Photo)(PTI14-04-2020_000057B)
पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी (COVID-19) से जूझ रही है और ऐसे में अचानक ही रैपिड एंटी बॉडी जांच (Rapid Anti body test), आरटी-पीसीआर जांच (RT-PCR test), संक्रमित स्थान (Coronavirus Infected location), संक्रमण की अधिकता वाले क्षेत्र जैसी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी शब्दावली भी सुर्खियों में आ गई हैं.
नयी दिल्ली : पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही है और ऐसे में अचानक ही रैपिड एंटी बॉडी जांच, आरटी-पीसीआर जांच, संक्रमित स्थान, संक्रमण की अधिकता वाले क्षेत्र जैसी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी शब्दावली भी सुर्खियों में आ गई हैं.
डॉक्टरों ने आम आदमी के लिये इन जांचों और शब्दावलियों की सरल शब्दों में व्याख्या की है. भारत में वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के मुताबिक अभी दो तरह की नैदानिक जांच की जा रही हैं- आरटी-पीसीआर जांच और रैपिड एंटीबॉडीज जांच.
विशेषज्ञों का कहना है कि रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज चेन रियेक्शन (आरटी-पीसीआर) परीक्षण प्रयोगशाला की एक तकनीक है जिसमें आरएनए का डीएनए में रिवर्स ट्रांस्क्रिप्शन किया जाता है जिससे विषाणु का पता चलता है जबकि एंटीबॉडीज जांच में रक्त का इस्तेमाल होता है और इसमें वायरस पर शरीर की प्रतिक्रिया देखी जाती है.
दिल्ली स्थिति फेफड़ों के प्रख्यात सर्जन डॉ. अरविंद कुमार ने कहा, आरटी-पीसीआर में देखा जाता है कि वायरस मौजूद है या नहीं. व्यक्ति की श्वास नली से एक नमूना लिया जाता है या फिर गले अथवा नाक से नमूना लेकर जांच की जाती है. नतीजे आने में 12 से 24 घंटे लगते हैं.
यहां सर गंगाराम अस्पताल में काम करने वाले कुमार कहते हैं कि आरटी-पीसीआर जांच में समय लगता है और यह महंगा भी है क्योंकि उसके किट में कई चीजें शामिल हैं. उन्होंने कहा, दूसरी तरफ, रैपिड एंटीबॉडीज परीक्षण कम महंगे हैं और नतीजे 20 से 30 मिनट में आ जाते हैं. यह अनिवार्य रूप से परीक्षण करता है कि कोरोना वायरस संक्रमण की प्रतिक्रिया में एंटीबॉडीज बनी या नहीं.
यह जांच सामान्य तौर पर संक्रमित स्थानों पर की जाती हैं जहां किसी खास क्षेत्र में संक्रमण की अधिकता मिली हो. संक्रमित स्थान (हॉटस्पॉट) वह क्षेत्र है जहां से कोविड-19 के मामले ज्यादा मिले हों. दिल्ली में सोमवार रात तक संक्रमण की अधिकता वाले 47 स्थान चिन्हित किये गए थे और उन्हें सील कर दिया गया है.
कुमार ने कहा, रैपिड एंटीबॉडीज जांच में नतीजे तभी सकारात्मक आएंगे जब एंटीबॉडीज बनेंगी. इसलिए, भले ही कोई व्यक्ति संक्रमित हो लेकिन एंटीबॉडीज नहीं बन रही हों तो उसकी जांच का नतीजा नकारात्मक रहेगा.
पूर्व में कई मामलों में ऐसा हुआ है जब पहले किसी व्यक्ति की जांच में संक्रमण नहीं मिला हो, लेकिन कुछ दिनों बाद जब वह किसी दूसरे देश में पहुंचा या पहुंची हो तो वहां उसमें संक्रमण मिला हो. अगर उस व्यक्ति का आरटी-पीसीआर परीक्षण किया गया होता तो वह संक्रमित मिलता, लेकिन इसके उपयोग की व्यवहार्यता का मुद्दा है.
सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच निशुल्क है, लेकिन निजी प्रयोगशालाओं में जो आरटी-पीसीआर जांच करती हैं उनकी लागत 4500 रुपये है. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपने आठ अप्रैल के उस आदेश में बदलाव किया जिसमें उसने कहा था कि निजी प्रयोगशालाएं कोविड-19 की जांच निशुल्क करें.
न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह लाभ उन्हीं लोगों को उपलब्ध होगा जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और जो आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजना के तहत लाभार्थी हैं. सरकार द्वारा जांच के लिये अधिकृत की गई प्रयोगशालाओं में से एक थायरोकेयर लैब्स के प्रवक्ता ने कहा कि परीक्षण बेहद न्यायोचित तरीके से होना है क्योंकि भारत में जांच किटों की संख्या सीमित है.
उन्होंने कहा, हम जांच करें उससे पहले इसके लिये डॉक्टर की अनुशंसा जरूरी है. मुंबई के रहने वाले चर्चित वीडियो ब्लॉगर निखिल हाल ही में ब्रिटेन से लौटे थे और उन्होंने अपनी जांच करवाई और जागरुकता फैलाने के लिये उसका वीडियो भी बनाया कि विदेशों से आने वाले लोगों को डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि मंगलवार को देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 339 हो गयी, जबकि संक्रमित लोगों का आंकड़ा 10,363 था. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने कहा कि नाक या मुंह से लिये गए नमूनों में से कोई भी सकारात्मक आता है तो व्यक्ति को कोविड-19 से पीड़ित माना जाता है.
विशेषज्ञों ने कहा कि इन परीक्षणों के नतीजे कितने सही होंगे यह कई कारकों पर निर्भर करता है जिनमें बीमारी के शुरू होने का समय, नमूने में वायरस का संकेंद्रण, व्यक्ति से लिये गए नमूने की गुणवत्ता, उसके विश्लेषण कैसे किया गया और जांच किट के अभिकर्मकों का सटीक निरूपण हुआ या नहीं,शामिल हैं.
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By ArbindKumar Mishra
मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.
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