Cough Syrup : डीईजी और ईजी बच्चों के किस अंग को पहुंचाता है नुकसान? कफ सिरप का सोच-समझकर करें इस्तेमाल
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 04 Oct 2025 11:47 AM
खांसी की दवाई की सांकेतिक तस्वीर (Photo: AI)
Cough Syrup : तमिलनाडु सरकार ने ‘कोल्डरिफ’ नामक ‘कफ सिरप’ की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. केंद्र ने 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देने की सलाह दी है. इस बीच डीईजी और ईजी को लेकर जांच किए गए. जानें क्या बात आई सामने.
Cough Syrup : केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें निर्देश दिया गया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाइयां नहीं दी जाएं.स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा यह एडवाइजरी जारी की गई है. एडवाइजरी मध्यप्रदेश में कथित तौर पर नकारात्मक प्रभाव वाले कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों की खबरों के बीच आई है.
डीईजी और ईजी पहुंचाता है किडनी को नुकसान
इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाया कि मध्यप्रदेश में टेस्ट किए गए किसी भी सिरप के नमूने में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं था. इन दोनों तत्वों से किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीजीएचएस ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप की सिफारिश नहीं की जाती है. इसमें कहा गया है कि बुजुर्ग लोगों के लिए इनका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए. इसके लिए उनकी अच्छी तरह से जांच करनी होगी, लगातार निगरानी करनी होगी और दवा की सही मात्रा का ध्यान रखना होगा.
कफ सिरप का सही और सोच-समझकर इस्तेमाल जरूरी
डीजीएचएस की डॉ. सुनीता शर्मा ने एडवाइजरी में कहा है कि लोगों को डॉक्टर की दी हुई दवाइयों का सही तरीके से पालन करने के लिए जागरूक किया जा सकता है. खासकर बच्चों के लिए कफ सिरप का सही और सोच-समझकर इस्तेमाल जरूरी है. बच्चों में गंभीर खांसी की बीमारियां अक्सर बिना दवा ही अपने आप ठीक हो जाती हैं. इसलिए दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें. एडवाइजरी में सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से कहा गया है कि वे दवाओं के सही और सुरक्षित उत्पाद खरीदें और वितरण करें, ताकि दवा सुरक्षित और प्रभावी रूप से उपलब्ध हो.
उत्पाद में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान और केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन की टीम ने मध्यप्रदेश में कफ सिरप के नमूने इकट्ठा करने के लिए दौरा किया. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि हाल ही में कफ सिरप पीने से कुछ बच्चों की मौत की खबरें आई हैं. टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की कि दवाइयां सुरक्षित हैं या नहीं.
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मंत्रालय ने कहा कि जांच में किसी भी कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) या एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) नहीं पाया गया, जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. मध्यप्रदेश राज्य खाद्य और औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की जांच कर इसकी पुष्टि की. राजस्थान में दूषित कफ सिरप से दो बच्चों की मौत की खबरों पर मंत्रालय ने बताया कि उस उत्पाद में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल नहीं है, जो डीईजी/ईजी के दूषित होने का कारण बन सकता है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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