ePaper

Chhattisgarh Coal Mine Protest: छत्तीसगढ़ में कोयला खदान पर भारी बवाल, पुलिस और ग्रामीणों के बीच भिड़ंत, गांव वाले बोले- जान चली जाए, लेकिन…

Updated at : 03 Dec 2025 7:12 PM (IST)
विज्ञापन
Chhattisgarh Amera coal mine

छत्तीसगढ़ अमेरा कोयला खदान. फोटो एक्स

Chhattisgarh Coal Mine Protest: छत्तीसगढ़ में कोयला खदान को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर बवाल हुआ. ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला कर दिया, जिसके बाद जवानों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. दरअसल कोयला खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीण गुस्से में हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी जान चली जाए, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे. आइये आपको बताते हैं पूरा मामला.

विज्ञापन

Chhattisgarh Coal Mine Protest: छत्तीसगढ़ अंबिकापुर के परसोड़ी कलां गांव के लोग बुधवार को आक्रोशित हो गए. ग्रामीणों ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की अमेरा कोयला खदान के विस्तार को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. जिसके बाद तनाव बढ़ गया. अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर फेंके. जवाब में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.

ग्रामीणों का क्या है कहना?

अंबिकापुर परसोड़ी कलां गांव की रहने वाली लीलावती कहती हैं, यह हमारे गांव की जमीन है, हम इसे देना नहीं चाहते. हम कहां जाएं? मेरे दादा, मेरे ससुर और मेरे पुरखों ने यहीं कमाया और रहे हैं. अब मेरी बारी है. क्या मैं इसे बेच दूं, फिर मेरा पोता या बेटा कहां जाएगा? क्या वे भीख मांगेंगे? मुझे यह सब नहीं चाहिए. हमारी पूरी जमीन माइनिंग में चली जाएगी. हम इसे देना नहीं चाहते. यह हमारे गांव की प्रॉपर्टी है. हम इसे देना नहीं चाहते.

हमारी जान चली जाए, लेकिन हम जमीन नहीं छोड़ेंगे : ग्रामीण

परसोड़ी कलां गांव की ही रहने वाली रामबाई कहती हैं, हमारी जान चली जाए, लेकिन हम यह जमीन नहीं छोड़ेंगे. भले ही वे मुझे गोली मार दें, मैं यह धरती मां नहीं छोड़ूंगी. पुलिस यहां आई है और हम पर दबाव बना रही है. हमारे पुरखे यहीं बसे थे, हम कहां जाएं, अपने बच्चों को कहां ले जाएं? हम नौकरी या मुआवजा नहीं लेंगे. हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे.

सरगुजा के अपर कलेक्टर ने क्या बताया?

सरगुजा के अपर कलेक्टर सुनील कुमार नायक ने कहा, परसोड़ी कलां गांव के लोग SECL अमेरा में इकट्ठा हुए हैं और कह रहे हैं कि वे आगे कोयला माइनिंग नहीं होने देंगे. जब हमने उनसे बात की, तो पता चला कि जमीन के सर्वे का प्रोसेस 2016 में पूरा हो गया था, और सर्वे के बाद कुछ गांव वालों को उनका मुआवजा मिल गया है. जमीन के सर्वे के प्रोसेस के बावजूद कई गांव वाले अभी भी मुआवजा लेने से मना कर रहे हैं और कोयला माइनिंग में रुकावट डाल रहे हैं. यहां पत्थरबाजी हुई, जिससे कई पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हो गए.”

ये भी पढ़ें: Naxal Encounter: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के साथ बड़ी मुठभेड़, 12 नक्सली ढेर, तीन जवान शहीद

विज्ञापन
ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola