चांदीपुरा वायरस: गुजरात में 5 सप्ताह में 25 बच्चों की मौत, जानें इलाज और बचाव के उपाय

Updated:
विज्ञापन

चांदीपुरा वायरस का सांकेतिक फोटो, PHOTO AI

गुजरात में खतरनाक 'चांदीपुरा वायरस' (Chandipura Virus) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले करीब पांच हफ्तों के भीतर इस वायरस के कारण 25 बच्चों की जान जा चुकी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की टीम अब तक इस बात का पता नहीं लगा पाई है कि यह वायरस आखिरकार पनप कहां रहा है.

विज्ञापन

गुजरात सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा प्रकोप में अब तक 39 बच्चों में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 25 बच्चों की मौत हो चुकी है.

हजारों सैंपल फेल, मुख्य वाहक में नहीं मिला वायरस

चांदीपुरा वायरस सैंडफ्लाई (रेत मक्खी या बालू मक्खी) के काटने से फैलता है. जो मुख्य रूप से कच्चे/मिट्टी के घरों की दरारों और मवेशियों के आसपास पाई जाती है. 30 जून से शुरू हुए इस प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया. रिसर्च करने वालों ने हजारों की संख्या में सैंडफ्लाई के सैंपल इकट्ठे किए. जब उनमें वायरस नहीं मिला, तो जांच का दायरा बढ़ाते हुए मच्छरों और किल्लियों (Ticks) के भी सैंपल लिए गए. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.

2024 में भी चांदीपुरा वायरस ने बरपाया था कहर

इससे पहले 2024 में भी चांदीपुरा वायरस का प्रकोप देखने को मिला था. उस दौरान भी 78 संदिग्ध बच्चों में से 28 की मौत हो गई थी, और व्यापक जांच के बावजूद वैज्ञानिक वायरस के मुख्य स्रोत को ढूंढने में नाकाम रहे थे. शोधकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब सभी ज्ञात वाहकों में वायरस मौजूद नहीं है, तो यह मासूम बच्चों तक कैसे पहुंच रहा है और कहां पनप रहा है. फिलहाल राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य टीमों द्वारा निगरानी और शोध का काम तेजी से जारी है.

चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बारे में जानें

  • वायरस का परिवार: यह रैबडोविराइडे (Rhabdoviridae) परिवार का सदस्य है.
  • प्रभावित क्षेत्र और समय: भारत के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान यह एईएस (AES) के मामले और आउटब्रेक पैदा करता है.
  • कैसे फैलता है: यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी), मच्छरों और किल्लनी (Ticks) जैसे कीटों के काटने से फैलता है.

चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है?

  • इस संक्रमण में मृत्यु दर काफी अधिक (56% से 75%) होती है. वर्तमान में इसका कोई सटीक इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
  • सही समय पर अस्पताल पहुंचने और सही इंटेन्सिव सपोर्टिव केयर से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है.

चांदीपुरा वायरस से बचाव के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कुछ जरूरी उपाय करने से चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है.

  • कीट नियंत्रण : जमा पानी और गंदगी को साफ रखना ताकि मच्छर और सैंडफ्लाई न पनप सकें.
  • काटने से बचाव: मच्छरों, सैंडफ्लाई और किल्लनी के काटने से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करें.


ये भी पढ़ें: क्या आपका शरीर भी दे रहा है वॉर्निंग? इन 6 संकेतों को समझना है बेहद जरूरी


विज्ञापन
अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola