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कैप्टन अमरिंदर के ‘नौ नुक्ते’ उनके ‘नौ झूठ’ बन चुके हैं - हरपाल सिंह चीमा

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
हरपाल सिंह चीमा
हरपाल सिंह चीमा
फाइल फोटो

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कैप्टन सरकार की विफलताओं को उजागर करने वाले कई मुद्दों को बुधवार को विधानसभा में उठाया और कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य को चलाने में नाकाम रहे हैं.

2017 विधानसभा के समय के कैप्टन अमरिंदर के 'नौ नुक्ते' अब उनके ‘नौ झूठ’ बन चुके हैं. उसके तहत किए गए सारे वादे अभी तक अधूरे हैं और उसके कारण लोग परेशान हैं. लेकिन कैप्टन अमरिंदर अभी भी इस भ्रम में हैं कि उन्होंने अपने सभी वादों को पूरा कर दिया.

अपने संबोधन में चीमा ने गुरु ग्रंथ साहिब के बेअदबी का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि जब कैप्टन अमरिंदर सत्ता में आए थे, तब उन्होंने कहा था कि वह घटना के पीडि़तों को न्याय दिलाएंगे, लेकिन इतने सालों बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है.

चीमा ने कहा कि बेअदमी मामले की जांच को पटरी से उतारने के लिए कई प्रयास किए गए, जो इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि कैप्टन अमरिंदर, हत्या में शामिल लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (स्त्रक्कष्ट) के चुनावों से संबंधित मुद्दे पर उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के चुनाव 2016 से लंबित है. केंद्र सरकार ने चुनावों में देरी को देखने के लिए 8 महीने पहले एक न्यायिक आयोग की नियुक्ति की थी.

लेकिन कैप्टन अमरिंदर ने अभी तक उन्हें कार्यालय नहीं दिया है. क्या कैप्टन अकाली दल के साथ मिले हुए हैं? इसीलिए जितना संभव हो चुनावों में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने रोजगार का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कैप्टन अमरिंदर ने वादा किया था कि वह पंजाब के प्रत्येक घर में एक नौकरी देंगे, लेकिन अन्य सभी वादे की तरह इस वादे को भी पूरा नहीं किया गया.

चीमा ने आगे कहा कि नौकरी के मेलों के नाम पर कैप्टन ने युवाओं कोई रोजगार दिया, सिर्फ सरकारी पैसे को बर्बाद करने का काम किया. इसके अलावा, सरकारी विभागों के पुनर्गठन के नाम पर कैप्टन ने हजारों नौकरियों को समाप्त कर दिया. उन्होंने पहले से मौजूद नौकरियों को समाप्त किया और पहले से कार्यरत लोगों को नव नियोजित के रूप में चित्रित किया. कैप्टन ने रोजगार के नाम पर लोगों को सिर्फ बेवकूफ बनाया.

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए चीमा ने कहा कि कई सरकारी संस्थान जो अपने क्षेत्र में सबसे अच्छा हुआ करते थे, आज बंद होने के कगार पर हैं. पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला, लुधियाना के कृषि विश्वविद्यालय और अमृतसर विश्वविद्यालय सब के सब तंगी हालत में है. पंजाब में शिक्षा व्यवस्था बर्बाद होने के कगार पर है. कैप्टन ने सरकारी स्कूलों की दीवारों को सिर्फ रंगीन किया और दावा किया कि उन्होंने हजारों स्मार्ट स्कूल बनाए.

स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को उठाते हुए चीमा ने आगे कहा कि हमारे निर्वाचन क्षेत्र डिर्बा में केवल एक डॉक्टर लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध है. सिर्फ मेरे निर्वाचन क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब में यही स्थिति है. सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गया है. कैप्टन ने लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया और निजी खिलाडिय़ों के हाथों स्वास्थ्य व्यवस्था को गिरवी रख दिया.

कृषि और किसानों के मुद्दे पर चीमा ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में कैप्टन ने सुनिश्चित किया था कि वे प्रधानमंत्री से मिलेंगे, लेकिन उनके द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया. वास्तव में कैप्टन गृह मंत्री से मिले और किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय उन्होंने अपने बेटे के मामले पर चर्चा की और 'पुत्र-मोह' में गृह मंत्री के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उन्होंने किसान आंदोलन को भी पटरी से उतारने की कोशिश की.

वे केन्द्र के हाई पावर्ड कमेटी में भी इन बिलों का विरोध नहीं किया. कैप्टन अमरिंदर खुद चाहते हैं कि बड़े-बड़े कॉर्पोरेट लोग आए और हमारे किसानों का जीवन बर्बाद कर दें. माफिया के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर ने वादा किया था कि वे चार सप्ताह में राज्य से माफियाओं को खत्म कर देंगे, लेकिन आज चार साल हो गए हैं, माफिया लोग अब भी सक्रिय हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में एक सरपंच को नशीली दवाओं के भंडाफोड़ में गिरफ्तार किया गया और उसकी तस्वीरें कैप्टन अमरिंदर के ओएसडी के साथ सामने आई थी. इससे स्पष्ट हो गया था कि माफियाओं का लिंक कैप्टन तक है.

चीमा ने कहा कि पिछले साल नकली शराब पीने से 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई, लेकिन इस व्यापार में शामिल होने वाले बड़े नामों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. खुद उनके जिले में कई नकली शराब कारखानों का भंडाफोड़ हुआ है. क्या कैप्टन अमरिंदर इतने कमजोर हैं कि वे अपनी नाक के नीचे नकली शराब बनाने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि यदि वे अपने जिले में अवैध शराब के उत्पादन को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, फिर हम उनसे राज्य के प्रबंधन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ?

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से संबंधित मुद्दे को उठाते हुए चीमा ने कहा कि गरीब छात्रों की छात्रवृत्ति का अभी तक वितरण नहीं किया गया है. इस कारण कई कॉलेज बंद होने के कगार पर है और छात्र अपनी डिग्री नहीं मिलने के कारण बेरोजगार बैठे हैं. लेकिन कैप्टन अपने फार्म हाउस में आनंद ले रहे हैं. उन्हें दलित छात्रों की कोई परवाह नहीं है. कैप्टन के मंत्री सीधे तौर पर छात्रवृति फंड के घपले में शामिल थे. यह बहुत ही शर्म की बात है कि गरीब दलित छात्रों पढ़ाई के पैसे उनके भ्रष्ट मंत्री खा गए.

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