‘सेल्फ डिफेंस में जान से मार सकते हैं?’ वायरल वीडियो के दावे के बीच जानिए भारत का कानून क्या कहता है
सेल्फ डिफेंस
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सेल्फ डिफेंस के अधिकार को लेकर किए गए दावों पर भारतीय कानून की गहराई से पड़ताल. जानिए कब किसी हमले में जानलेवा बल का इस्तेमाल करना कानूनी तौर पर सही है और कब नहीं.
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक शख्स सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के अधिकार की बात करते हुए सामने वाले की जान लेने तक की बात करता नजर आ रहा है. वीडियो में किए गए दावे के बीच यह समझना जरूरी है कि भारतीय कानून आत्मरक्षा का अधिकार तो देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी विवाद या हमले की स्थिति में सामने वाले की जान लेना कानूनी रूप से जायज हो जाता है.
भारत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 34 से 44 में निजी बचाव यानी Right of Private Defence से जुड़े प्रावधान हैं.
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कब जानलेवा बल का इस्तेमाल हो सकता है?
BNS की धारा 38 बताती है कि किन परिस्थितियों में शरीर की निजी रक्षा का अधिकार हमलावर की मौत तक पहुंचने वाले बल के इस्तेमाल तक बढ़ सकता है. इसमें ऐसे हमले शामिल हैं, जिनसे मौत या गंभीर चोट का उचित खतरा हो, बलात्कार या कुछ गंभीर यौन अपराधों का खतरा हो, अपहरण या गलत तरीके से बंधक बनाने की आशंका हो, या ऐसा हमला हो जिससे व्यक्ति को लगे कि वह खुद को छुड़ा नहीं सकता.
हर लड़ाई में यह अधिकार नहीं मिलता
कानून में कुछ गंभीर परिस्थितियों में जानलेवा हमले से बचने के लिए हमलावर की मौत तक होने वाली कार्रवाई को निजी बचाव के दायरे में रखा गया है. लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण बात है कि सिर्फ बहस, गाली-गलौज, मामूली धक्का-मुक्की या सामान्य विवाद को आधार बनाकर किसी व्यक्ति की जान लेना अपने-आप में सेल्फ डिफेंस नहीं माना जाएगा.
कानून निजी बचाव के अधिकार की सीमाएं भी तय करता है. BNS की धारा 37 उन परिस्थितियों को बताती है, जिनमें निजी बचाव का अधिकार उपलब्ध नहीं होता. इसके अलावा, निजी बचाव का अधिकार बदला लेने का अधिकार नहीं है. इसका उद्देश्य तत्काल खतरे से खुद को या किसी अन्य व्यक्ति को बचाना है.
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खतरा खत्म होने के बाद क्या?
BNS की धारा 40 के अनुसार शरीर की निजी रक्षा का अधिकार तब शुरू होता है जब शरीर को खतरे की उचित आशंका पैदा होती है. वहीं, यह केवल खतरा बने रहने तक ही लागू रहता है. इसलिए अगर हमलावर पीछे हट चुका है और तत्काल खतरा खत्म हो चुका है, तो उसके बाद बदले की कार्रवाई को केवल ‘सेल्फ डिफेंस’ बताना कानूनी रूप से सुरक्षित नहीं माना जा सकता.
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इसलिए वायरल वीडियो में कही गई सेल्फ डिफेंस में सामने वाले को जान से मार सकते हैं जैसी बात लोगों को अच्छा और फनी लग सकता है, लेकिन इसके कानूनी गंभीरता को बिना जाने, इसे सामान्य नियम समझना सही नहीं होगा.
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लेखक के बारे में
By दीपक कुमार गुप्ता
दीपक कुमार गुप्ता 'प्रभात खबर डिजिटल' में कंटेंट राइटर हैं. इससे पहले वे 'ईटीवी भारत' में करीब ढाई साल तक कार्यरत रहे. इन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 2021 से वे पत्रकारिता से जुड़े हैं और इस दौरान 'न्यूज प्लस', 'अंतर्कथा विजन न्यूज' और 'पब्लिक ऐप' के साथ भी काम कर चुके हैं.
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