टेरर फंडिंग और लेवी वसूली मामला: NIA कोर्ट ने 12 दोषियों को सुनाई 5 से 10 साल की सजा
12 दोषियों को NIA कोर्ट ने सुनाई सजा (AI जनरेटेड इमेज)
झारखंड के चतरा जिले में कोयला लेवी वसूली और प्रतिबंधित टीपीसी के लिए फंड जुटाने के मामले में NIA की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को सजा सुनाई है. 5 को 10 साल, 6 को 8 साल और एक को 5 साल की कैद हुई है.
रांचीः झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में कोयला कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और व्यवसायियों से लेवी वसूलने तथा प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के लिए फंड जुटाने से जुड़े मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को सजा सुनाई है. अदालत ने 5 दोषियों को 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. वहीं 6 दोषियों को 8 साल की सश्रम कारावास की सजा दी गई है. एक अन्य दोषी को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई. यह मामला एनआईए केस आरसी-06/2018/एनआईए/डीएलआई से संबंधित है.
इन दोषियों को मिली सजा
मामले में टीपीसी के सक्रिय सदस्य बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा, विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां को सजा सुनाई गई है.
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कोयला खनन और परिवहन से लेवी वसूली का आरोप
आरोप था कि कोयला खनन और उसके परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलकर प्रतिबंधित टीपीसी के लिए धन जुटाया जाता था. संगठन से जुड़े सदस्य और कैडर स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियों को जारी रखने के बदले लेवी की वसूली करते थे. जांच के दौरान एनआईए ने पाया कि प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी के सदस्य और कैडर इस आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. एनआईए के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी से भी संबद्ध थे. स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर कोयला खदानों से खनन और कोयले के परिवहन की अनुमति देने के बदले लेवी वसूलने की व्यवस्था संचालित की जा रही थी.
21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
एनआईए ने इस मामले में कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया था. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी पाया.
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लेखक के बारे में
By अर्चना कुजूर
अर्चना कुजूर एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वह झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. अर्चना ने वर्ष 2016 में क्राफ्ट फिल्म स्कूल, रोहिणी (नई दिल्ली) से टीवी जर्नलिज्म एंड न्यूज रीडिंग में एक वर्षीय डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा स्थित नेशनल वॉयस न्यूज और इंडिया वॉयस न्यूज चैनल (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) में इंटर्नशिप करने के साथ-साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया.
झारखंड लौटने के बाद उन्होंने कशिश न्यूज चैनल में लगभग डेढ़ वर्ष तक आउटपुट विभाग में कॉपी राइटर के रूप में कार्य किया. इसके बाद रांची एक्सप्रेस में एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग की और प्रिंट पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया. वर्ष 2022 से उन्होंने न्यूज11 भारत और नक्षत्र न्यूज चैनल में लगभग दो-दो वर्षों तक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए राज्य की राजनीति, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, योजनाओं और समसामयिक विषयों पर हजारों समाचार और विशेष लेख लिखें.
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