भारत में विदेशी पर्यटक क्यों नहीं आ रहे? थाईलैंड-वियतनाम से पीछे रहने की 3 बड़ी वजहें

Updated:
विज्ञापन

इतना खूबसूरत भारत, फिर भी विदेशी पर्यटक कम क्यों? पर्यटन की असली कहानी

भारत के पास हिमालय, 7,000 किमी लंबी तटरेखा, जंगल, रेगिस्तान और हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत है. फिर भी विदेशी पर्यटकों की संख्या 2019 के स्तर से नीचे है. आखिर थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका भारत से आगे कैसे निकल गए? जानिए पर्यटन सेक्टर की मार्केटिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटक अनुभव से जुड़ी बड़ी चुनौतियां.

विज्ञापन

भारत दुनिया के सबसे विविध पर्यटन स्थलों में शामिल है. हिमालय से लेकर समुद्र तटों तक, रेगिस्तान से लेकर वर्षावनों तक और प्राचीन विरासत से लेकर आध्यात्मिक स्थलों तक- देश के पास पर्यटन के लिए लगभग हर तरह का अनुभव मौजूद है.

इसके बावजूद भारत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की दौड़ में कई एशियाई देशों से पीछे है. सबसे अहम बात यह है कि महामारी के बाद जहां दुनिया के कई पर्यटन बाजार तेजी से लौटे हैं, वहीं भारत अभी भी 2019 के स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है.

विदेशी पर्यटकों के मामले में भारत कहां खड़ा है?

2019 में भारत में करीब 1 करोड़ विदेशी पर्यटक आए थे. 2025 में यह संख्या करीब 90 लाख रही. इसके उलट वियतनाम ने 2024 में करीब 1.75 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया. श्रीलंका, जिसने आर्थिक संकट, ईस्टर बम धमाकों और कोविड जैसी बड़ी चुनौतियां देखीं, 2025 में करीब 23.6 लाख पर्यटकों तक पहुंच गया.

थाईलैंड भी महामारी से पहले के करीब 4 करोड़ पर्यटकों के मुकाबले अब करीब 3.5 करोड़ पर्यटकों तक पहुंच चुका है. दुबई में 2019 के 1.67 करोड़ अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों की तुलना में 2025 में करीब 1.96 करोड़ पर्यटक पहुंचे.

भारत की समस्या इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स में भारत 119 अर्थव्यवस्थाओं में 39वें स्थान पर है.

प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भारत छठे और सांस्कृतिक संसाधनों में नौवें स्थान पर है. यानी समस्या पर्यटन संसाधनों की कमी की नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक पर्यटन उत्पाद में बदलने की है.

Read more: BRICS में UPI की एंट्री! क्या भारत बना रहा है डॉलर और SWIFT का विकल्प?

समस्या कहां है?

1. पर्यटन मार्केटिंग में निवेश की कमी

कभी Incredible India, Atithi Devo Bhava और राज्यों के अलग-अलग पर्यटन अभियानों ने भारत की वैश्विक पर्यटन छवि बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. अमिताभ बच्चन के गुजरात पर्यटन अभियान से लेकर केरल, असम और अन्य राज्यों के अभियानों तक, भारत ने सेलिब्रिटी और अनुभव आधारित मार्केटिंग का इस्तेमाल किया.

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विदेशी बाजारों में पर्यटन प्रचार पर खर्च में कमी आई है.

दूसरी तरफ मलेशिया सालाना करीब 7 करोड़ डॉलर और थाईलैंड करीब 12 करोड़ डॉलर पर्यटन मार्केटिंग पर खर्च करता है. वियतनाम ने सिर्फ मार्केटिंग ही नहीं, बल्कि वीजा व्यवस्था को भी आसान बनाया है. वहां ई-वीजा का विस्तार, लंबी अवधि के मल्टीपल-एंट्री वीजा और पात्र देशों के लिए लंबी वीजा-मुक्त अवधि जैसी सुविधाएं विदेशी यात्रियों के लिए प्रवेश आसान बनाती हैं.

2. होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

भारत में पर्यटन बढ़ाने के सामने दूसरा बड़ा संकट हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का है. देश में 2 लाख से अधिक होटल कमरों की कमी का अनुमान सामने आता है.

एक होटल परियोजना को निर्माण और लाइसेंसिंग में करीब 36 से 48 महीने लग सकते हैं, जबकि कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में यह अवधि करीब 12 से 18 महीने है.

होटल शुरू करने के लिए अलग-अलग विभागों से लाइसेंस, फूड एंड बेवरेज परमिट, फायर क्लीयरेंस, पर्यावरण और तटीय क्षेत्र संबंधी मंजूरियां लेनी पड़ती हैं. इन प्रक्रियाओं के बीच एक प्रभावी सिंगल-विंडो व्यवस्था का अभाव परियोजनाओं को धीमा करता है.

3. आकर्षण विश्वस्तरीय, लेकिन अनुभव नहीं

भारत के पास ताजमहल, कश्मीर, केरल, हिमालय, राजस्थान, पूर्वोत्तर, समुद्र तट, जंगल और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत विरासत है. लेकिन कई पर्यटन स्थलों पर सफाई, भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुविधाओं, स्थानीय परिवहन और बहुभाषी गाइड जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी चुनौती हैं.

धार्मिक पर्यटन इसका बड़ा उदाहरण है. अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और अन्य धार्मिक केंद्रों में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों के अनुरूप स्वच्छता और शहरी सुविधाओं को लगातार बेहतर करने की जरूरत है.

यानी भारत के पास destination तो है, लेकिन कई जगहों पर उसके आसपास का tourism experience अभी विश्वस्तरीय नहीं है.

Read more: UPSC Mains 2026: अब सिर्फ Static पढ़ना काफी नहीं, PYQ बता रहे हैं परीक्षा किस दिशा में जा रही है

केरल ने दिखाया रास्ता

भारत के भीतर ही केरल एक महत्वपूर्ण उदाहरण है.

God's Own Country अभियान ने किसी एक स्मारक या समुद्र तट को बेचने के बजाय पूरे राज्य को एक एकीकृत पर्यटन ब्रांड के रूप में प्रस्तुत किया.

इससे यह सबक मिलता है कि पर्यटन केवल आकर्षणों की सूची नहीं है. उसे एक कहानी, ब्रांड और अनुभव के रूप में दुनिया के सामने पेश करना पड़ता है.

इसके उलट पूर्वोत्तर भारत में विशाल प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षमता के बावजूद पर्यटन की हिस्सेदारी बेहद कम है. आठ राज्यों वाले इस क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय सीमा करीब 5,300 किलोमीटर है, लेकिन देश के घरेलू और विदेशी पर्यटन में इसका हिस्सा अभी बहुत सीमित है.

नए अवसर कहां हैं?

भारत के पर्यटन क्षेत्र में कई नए रास्ते खुल रहे हैं.

  • होमस्टे और बजट ट्रैवल: होटल कमरों की कमी को दूर करने में होमस्टे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. बैकपैकिंग और वर्क-फ्रॉम-एनीवेयर संस्कृति के कारण हॉस्टल और बजट स्टे भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं.
  • क्रूज और रिवर टूरिज्म: भारत की लंबी तटरेखा और विशाल नदी तंत्र के बावजूद यह क्षेत्र अभी शुरुआती अवस्था में है. 2013 में देश में केवल तीन नदी क्रूज जहाज थे, जो 2024 तक बढ़कर 25 हो गए. क्रूज भारत मिशन के तहत 2027 तक 51 क्रूज सर्किट विकसित करने का लक्ष्य है.
  • हेरिटेज टूरिज्म: स्वदेश दर्शन जैसी योजनाओं के तहत बौद्ध, तटीय, रेगिस्तानी, हिमालयी, जनजातीय और आध्यात्मिक सर्किट विकसित किए जा रहे हैं.
  • लक्षद्वीप और अंडमान: भारत के द्वीपीय क्षेत्रों में लग्जरी, इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की बड़ी संभावनाएं हैं. लक्षद्वीप में लगून विला और अंडमान में नए डाइविंग साइट जैसे प्रयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं.
  • MICE Tourism: Meetings, Incentives, Conferences and Exhibitions यानी MICE पर्यटन हाई-वैल्यू टूरिज्म का बड़ा क्षेत्र बन सकता है. जी20 के दौरान भारत ने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय बैठकों का आयोजन कर अपनी क्षमता साबित की. अब ऐसी गतिविधियों को दिल्ली-आगरा-जयपुर से आगे केरल, पूर्वोत्तर और दूसरे राज्यों तक ले जाने की जरूरत है.

विदेशी पर्यटक क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?

पर्यटन सिर्फ होटल, टैक्सी और रेस्तरां का कारोबार नहीं है. यह रोजगार, विदेशी मुद्रा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा स्रोत है.

वित्त वर्ष 2024 में पर्यटन ने भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 15.73 लाख करोड़ रुपये, यानी लगभग 5.2 प्रतिशत का योगदान दिया और करीब 8.46 करोड़ नौकरियों को समर्थन दिया. पर्यटन से करीब 35 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा अर्जन भी हुआ.

चुनौती अब यह नहीं है कि भारत के पास पर्यटकों को देने के लिए क्या है.
चुनौती यह है कि क्या भारत दुनिया को यह अनुभव आसानी से, सुरक्षित, स्वच्छ, सुविधाजनक और आकर्षक तरीके से बेच सकता है?

विदेशी पर्यटक आमतौर पर घरेलू पर्यटक की तुलना में कहीं अधिक खर्च करता है. इसलिए विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाना भारत के लिए सिर्फ संख्या बढ़ाने का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रति पर्यटक आर्थिक मूल्य बढ़ाने की रणनीति भी है.

2047 तक 10 करोड़ विदेशी पर्यटकों का लक्ष्य

भारत ने 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ पर्यटन को करीब 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और विदेशी पर्यटकों की संख्या को मौजूदा करीब 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ करने की महत्वाकांक्षा सामने रखी गई है.

यह लक्ष्य बड़ा जरूर है, लेकिन भारत की पर्यटन क्षमता को देखते हुए असंभव नहीं है. असली सवाल यह है कि क्या भारत अपने पर्यटन संसाधनों को विश्वस्तरीय अनुभव, आसान वीजा, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्याप्त होटल, साफ-सुथरे शहर और आक्रामक वैश्विक मार्केटिंग में बदल पाता है.


विज्ञापन
अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola