कैब ड्राइवरों की हड़ताल: ओला-उबर क्यों बंद? जानें वजह
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 07 Feb 2026 11:35 AM
कैब ड्राइवरों की हड़ताल (Photo: Telangana Gig and Platform Workers Union @TGPWU )
Cab Driver Strike : यूनियन ने सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि ऐप से जुड़े ड्राइवरों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है और लाखों ड्राइवर गरीबी की ओर जा रहे हैं. एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं.
Cab Driver Strike : ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं के ड्राइवर आज 7 फरवरी को देशभर में हड़ताल पर हैं. ड्राइवर इस हड़ताल को “ऑल इंडिया ब्रेकडाउन” नाम दे रहे हैं. उनका कहना है कि कंपनियां लगातार उनका शोषण कर रही हैं. कमीशन बढ़ रहा है, किराया कम मिल रहा है और काम का दबाव ज्यादा है. इसी वजह से उनकी कमाई घटती जा रही है. पोर्टर और दूसरी ट्रांसपोर्ट ऐप्स से जुड़े ड्राइवर भी इस हड़ताल में शामिल हैं. ड्राइवर सरकार और कंपनियों से बेहतर कमाई और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.
ड्राइवरों यूनियन ने लिखा नितिन गडकरी को पत्र
ड्राइवरों की यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को लिखे पत्र में हड़ताल की बड़ी वजह बताई है. यूनियन का कहना है कि ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर जैसी ऐप कंपनियों के लिए सरकार की तरफ से किराया तय करने का कोई नियम नहीं है. ऑटो, कैब और बाइक टैक्सी का किराया कंपनियां अपनी मर्जी से तय कर देती हैं. इसी वजह से ड्राइवरों को कई बार बहुत कम पैसे मिलते हैं. ड्राइवर चाहते हैं कि सरकार न्यूनतम किराया तय करे और नियम बनाए.
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शोषण लगातार जारी, यूनियन ने कहा
यूनियन का कहना है कि सरकार की तरफ से किराया तय करने के नियम न होने की वजह से ड्राइवरों की कमाई अनस्टेबल हो गई है. इससे लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स को शोषण झेलना पड़ रहा है और काम की हालत भी ठीक नहीं है. तेलंगाना गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) समेत कई ड्राइवर यूनियनों ने 7 फरवरी 2026 को “ऑल इंडिया ब्रेकडाउन” के नाम से देशभर में हड़ताल बुलाई है. TGPWU ने X पर लिखा कि न्यूनतम किराया नहीं है, कोई नियम नहीं हैं और शोषण लगातार जारी है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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