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नारायण साईं को झटका, फर्लो देने के गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Updated at : 20 Oct 2021 6:06 PM (IST)
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नारायण साईं को झटका, फर्लो देने के गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

Narayan Sai Latest News: स्वयंभू प्रवचनकर्ता आसाराम के बेटे एवं बलात्कार के दोषी नारायण साईं को 14 दिन की ‘फर्लो’ दिये जाने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को बुधवार को खारिज कर दिया.

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नयी दिल्ली: बलात्कार के आरोपों में जेल में बंद स्वयंभू संत आसाराम बाबू और उनके बेटे नारायण साईं (Narayan Sai Latest News) जेल में बंद हैं. आसाराम के बेटे नारायण साईं ने फर्लो मांगा था, जिसे गुजरात हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया था. लेकिन, नारायण साईं को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के फर्लो देने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी.

स्वयंभू प्रवचनकर्ता आसाराम के बेटे एवं बलात्कार के दोषी नारायण साईं को 14 दिन की ‘फर्लो’ दिये जाने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को बुधवार को खारिज कर दिया. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने साईं को ‘फर्लो’ देने के अदालत के 24 जून के आदेश को चुनौती देने वाली गुजरात सरकार की याचिका स्वीकार कर ली.

शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘फर्लो’ कोई पूर्ण अधिकार नहीं हैं. इसे देना कई बातों पर निर्भर करता है. उसने कहा कि साईं की कोठरी से एक मोबाइल फोन मिला था, इसलिए जेल अधीक्षक ने राय दी थी कि उसे ‘फर्लो’ नहीं दी जानी चाहिए. न्यायालय ने साईं को दो हफ्तों की फर्लो देने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश पर 12 अगस्त को रोक लगा दी थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की याचिका पर नारायण साईं को नोटिस दिया था. इस याचिका में उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गयी थी. न्यायालय ने अगले आदेश तक उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी. उसने कहा था कि बंबई फर्लो एवं पैरोल नियम 1959 के नियम 3 (2) में यह प्रावधान है कि आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदी को सात वर्ष वास्तविक कैद की सजा पूरी करने के बाद ‘हर वर्ष’ फर्लो पर रिहा किया जा सकता है.

हाईकोर्ट की एकल पीठ के 24 जून 2021 के आदेश में साईं को दो हफ्तों के लिए फर्लो दी गयी थी, लेकिन खंडपीठ ने 13 अगस्त तक इस पर रोक लगा दी थी. इसके बाद राज्य ने 24 जून के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था. राज्य सरकार ने दलील दी थी कि नियमों और इस अदालत के आदेश के अनुसार भी ऐसा कहा गया है कि फर्लो कोई पूर्ण अधिकार नहीं है और इसे देना विभिन्न बातों पर निर्भर करता है.

सूरत की दो बहनों ने लगाये थे यौन उत्पीड़न के आरोप

राज्य सरकार ने कहा था कि नारायण साईं और उसके पिता को बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है और वे धन एवं बल के साथ काफी प्रभाव भी रखते हैं. सूरत की एक अदालत ने साईं को 26 अप्रैल 2019 को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 323 (हमला), 506-2 (आपराधिक धमकी) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनायी थी.

नारायण साईं और उसके पिता आसाराम के खिलाफ सूरत की रहने वाली दो बहनों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके बाद राजस्थान में एक लड़की के बलात्कार के आरोप में आसाराम को वर्ष 2013 में गिरफ्तार किया गया था. सूरत की पीड़तों में से बड़ी बहन ने आसाराम पर आरोप लगाया था कि जब वह उसके अहमदाबाद आश्रम में रही थी, उस समय 1997 से 2006 के बीच आसाराम ने उसका यौन उत्पीड़न किया था.

पीड़िता की छोटी बहन ने नारायण साईं पर आरोप लगाया था कि जब वह वर्ष 2002 से 2005 के बीच सूरत के जहांगीरपुरा इलाके में आसाराम के आश्रम में रही थी, तब उसने उसका यौन उत्पीड़न किया था. साईं को दिल्ली-हरियाणा सीमा से वर्ष 2013 में गिरफ्तार किया गया था.

Posted By: Mithilesh Jha

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