अरविंद केजरीवाल की जमानत पर अब 1 जून को होगी सुनवाई, कोर्ट ने ईडी को किया नोटिस
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 30 May 2024 2:26 PM
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सुप्रीम कोर्ट से जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्रायल कोर्ट का रुख किया है.
Arvind Kejriwal : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जमानत के लिए गुरुवार सुबह राउज एवेन्यू कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है और कहा है कि अब इस मामले पर एक जून को दोपहर दो बजे सुनवाई होगी. गौरतलब है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद गुरुवार सुबह अरविंद केजरीवाल ने ट्रायल कोर्ट का रुख किया. गौरतलब है कि उन्हें दो जून को कोर्ट के सामने सरेंडर करना है, इसलिए स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने जमानत अवधि बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
दो जून को करना है सरेंडर
शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अरविंद केजरीवाल की जमानत अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि चूंकि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने पर फैसला पहले ही सुरक्षित रखा जा चुका है, कोर्ट उनकी अंतरिम जमानत कोबढ़ाने की याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका का मुख्य याचिका से कोई संबंध नहीं है.
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स्वास्थ्य कारणों का दिया था हवाला
अरविंद केजरीवाल की याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज करते हुए कहा कि चूंकि उन्हें नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट जाने की इजाजत मिली है, इसलिए कोर्ट उनकी जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका पर विचार नहीं कर सकता है. अरविंद केजरीवाल के वकील ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उनकी जमानत अवधि को सात दिनों तक बढ़ाने का आग्रह कोर्ट से किया था.
शराब घोटाला है फर्जी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि शराब घोटाला फर्जी है. इस तरह घोटाला अगर हुआ होता तो इसके कुछ सबूत भी मिलते और घोटाले में शामिल लोगों के पास कुछ बरामदगी भी होती, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं है, इससे यह बात साबित होती है कि यह घोटाला फर्जी है और यह महज बीजेपी की साजिश का हिस्सा है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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