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AQI Delhi : दिल्ली की हवा जहरीली, सांस लेना मुश्किल, पिछले 5 साल में सबसे खराब स्तर; GRAP-2 लागू

Updated at : 22 Oct 2025 3:10 PM (IST)
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Air Pollution in delhi

दिल्ली में प्रदूषण

AQI Delhi : दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा में धूल की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए GRAP-2 लागू कर दिया है. दिल्ली के अधिकतर इलाकों में AQI 350 के पार है, जो बहुत खराब स्थिति को बताता है.

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AQI Delhi : दीपावली के बाद से दिल्ली की हवा जहरीली बनी हुई है. दिवाली के बाद आज दूसरे दिन भी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से अधिक है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार यह हवा की स्थिति को बहुत खराब बताता है. हवा में प्रदूषण की मात्रा इतनी अधिक हो जाने के बाद दिल्ली में GRAP-2 लागू हो गया है, जो स्थिति की गंभीरता को बताता है. पिछले 5 सालों में हवा की स्थिति सबसे खराब है.

दिल्ली के प्रमुख इलाकों में हवा की स्थिति कैसी है?

दिल्ली के कुछ प्रमुख इलाकों में हवा की बहुत खराब स्तर पर ही रही. आरके पुरम में AQI 380 पर है, जो बहुत खराब स्तर को बताता है. अक्षरधाम में 360 है और यह भी हवा में प्रदूषण की मात्रा बहुत खराब की ही सूचना दे रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सुबह 7 बजकर 5 मिनट का आंकड़ा जारी किया है. आईटीओ में AQI 361 के स्तर पर रहा, जबकि अन्य इलाकों में भी हवा में प्रदूषण की मात्रा 300 के पार ही रही.

सर्दी की शुरुआत के साथ ही दिल्ली में हवा की गुणवत्ता पर संकट गहराने लगता है और दिवाली ने हवा को दमघोंटू बना दिया है. दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध की शुरुआत इसी प्रदूषण को रोकने के लिए हुई थी. कोर्ट ने इस वर्ष ग्रीन पटाखों पर से प्रतिबंध हटा दिया था. पर्यावरणविदों का कहना है कि ग्रीन पटाखे प्रदूषण नहीं करते यह सोच गलत है. अब हवा की स्थिति बहुत खराब स्तर पर है और इसकी वजह से बच्चों और बुजुर्गों में सांस से संबंधित समस्याएं बढ़ सकती हैं.

क्या है  GRAP-2?

दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए GRAP-2 की शुरुआत हो गई है. इसके तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू कर दिया जाता है, ताकि धूल ना उड़े और हवा में प्रदूषण की मात्रा कम हो. इसके साथ ही ट्रैफिक को भी नियंत्रित किया जाएगा ताकि गाड़ियां सिग्नल पर खड़ी ना हो, ताकि प्रदूषण कम हो. धूल रोकने के लिए दिन में एक बार या दो दिन में एक बार डस्ट सप्रेसेन्ट का इस्तेमाल होता है.सीएनजी गाड़ियों को प्रोत्साहित करना. सहित कई अन्य उपाय करना ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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