Amit Shah On Naxalite: नक्सलियों के पास बचा है कम समय, गृह मंत्री शाह की हुंकार - गोलियों का जवाब, गोलियों से देना होगा

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 28 Sep 2025 7:34 PM

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

Amit Shah On Naxalite: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद और नक्सलियों पर बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी भी दी है. शाह ने एक बार फिर से दोहराया कि नक्सलियों के पास अब बहुत कम समय बचा है.उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- गोलियां का जवाब गोलियों से ही दिया जाएगा.

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Amit Shah On Naxalite: दिल्ली में नक्सलवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हाल ही में भ्रम फैलाने के लिए एक पत्र लिखा गया था जिसमें कहा गया था कि अब तक जो कुछ हुआ है वह एक गलती थी, युद्धविराम की घोषणा की जानी चाहिए और हम आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. युद्धविराम नहीं होगा. नक्सलियों से अमित शाह ने कहा- अगर आप आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो युद्धविराम की कोई जरूरत नहीं है. अपने हथियार डाल दीजिए. पुलिस एक भी गोली नहीं चलाएगी.”

अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा, हम नक्सलियों को मारना नहीं चाहते?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “ये वामपंथी जो नक्सलियों के बचाव में खड़े हैं और कहते हैं कि वे हमारे लोग हैं और उन्हें क्यों मारा जाना चाहिए? हम उन्हें मारना नहीं चाहते. 290 लोग इसलिए मारे गए क्योंकि वे हथियारबंद थे. हमने 1,090 को गिरफ्तार किया. जहां गिरफ्तारी संभव थी, हमने उन्हें गिरफ्तार किया. 881 ने आत्मसमर्पण किया. यह सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है.

गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाना चाहिए : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- “सरकार का दृष्टिकोण यह है कि हम नक्सलियों को गिरफ्तार करने और उन्हें आत्मसमर्पण कराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. हम उन्हें एक मौका भी देते हैं. हमने एक अच्छी आत्मसमर्पण नीति भी शुरू की है. लेकिन जब आप हथियार उठाते हैं और भारत के निर्दोष नागरिकों को मारने के लिए तैयार होते हैं, तो सुरक्षा बलों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है. गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाना चाहिए.”

सीपीआई और सीपीआई(एम) ने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का किया विरोध : अमित शाह

वामपंथी दल वामपंथी हिंसा से सार्वजनिक रूप से दूर रहे थे. लेकिन जैसे ही ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट हुआ, उनकी तुच्छ सहानुभूति उजागर हो गई. उन्होंने पत्र और प्रेस नोट लिखकर मांग की कि ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तुरंत बंद किया जाए. सीपीआई और सीपीआई(एम) ने ऐसा किया। उन्हें उनकी रक्षा करने की क्या ज़रूरत है… एनजीओ पीड़ित आदिवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आगे क्यों नहीं आते? क्या ये लंबे-चौड़े लेख लिखने वाले और हमें सलाह देने वाले सभी लोगों ने कभी आदिवासी पीड़ितों के लिए एक लेख लिखा है? उन्हें इसकी चिंता क्यों नहीं है? आपकी सहानुभूति और सहानुभूति इतनी चुनिंदा क्यों है?…”

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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