AI: वैश्विक एआई सम्मेलन में खतरे और संभावनाओं के रोडमैप पर होगा गहन मंथन

एआई तकनीक के मामले में भारत अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयारी कर रहा है. इस कड़ी में पहली बार इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में 100 देशों के प्रतिनिधि के अलावा 15-20 देशों के प्रमुख, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्रालय, वैश्विक और भारत के प्रमुख कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ के अलावा प्रमुख लोगों के शामिल होने की संभावना है.
AI: मौजूदा समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) के कारण तकनीकी क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है. एआई तकनीक के मामले में भारत अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है. इस कड़ी में पहली बार इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में 100 देशों के प्रतिनिधि के अलावा 15-20 देशों के प्रमुख, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्रालय, वैश्विक और भारत के प्रमुख कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ के अलावा प्रमुख लोग शामिल हो रहे हैं. दिल्ली में एआई पर होने वाला सम्मेलन ग्लोबल साउथ में पहली वैश्विक एआई सम्मेलन है. इस सम्मेलन का मकसद यह संदेश देना है कि एआई के मामले में विकासशील देशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
सम्मेलन में इस बात पर मंथन होगा कि एआई के जरिए कैसे गरीबी को दूर किया जा सकता है. क्योंकि एआई के प्रयोग कृषि से लेकर स्वास्थ्य, सरकार सेवा मुहैया कराने के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखता है. सम्मेलन का मकसद लोगों को यह बताना है कि कैसे एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती और सरकारी सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच को सुनिश्चित कर सकती है. इस दौरान स्वदेशी निर्मित ‘परम-2’ नाम का नया एआई मॉडल लांच होगा. यह एक बहुभाषी मॉडल है, जो आम लोगों को उसकी जरूरत की भाषाओं, सरकारी जरूरतों और भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
‘परम-2’ भारत की सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध होगा. इसके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए भारत-विस्तार(वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एसेस एग्रीकल्चरल रिसोर्स) की भी शुरुआत होगी. यह टूल किसानों के लिए कई भाषाओं में उपलब्ध होगा. देश में एआई के विकास के लिए पिछले साल सरकार की ओर से चार एआई स्टार्टअप्स को फंडिंग के लिए चुना गया. हालांकि कई जानकारों का कहना है कि एआई के कारण रोजगार के 50 फीसदी अवसरों में एआई के कारण कमी आ सकती है, लेकिन वहीं दूसरी ओर रोजगार के लिए एआई विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ेगी. आने वाले समय में एआई के मामले में भारत एक बड़ा बाजार बनकर उभर सकता है. इस सम्मेलन से भारत वैश्विक एआई बाजार में खुद को प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करने में कामयाब होगा.गौरतलब है कि
इससे पहले तीन एआई सम्मेलन सबसे पहले 1-2 नवंबर 2023 को ब्रिटेन में हुआ था. इसमें एआई की सुरक्षा पर चर्चा हुई और ‘ब्लेचली डिक्लेरेशन’ जारी किया गया था. इसके बाद दूसरा सम्मेलन 21-22 मई 2024 को साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में हुआ, जिसमें एआई को सुरक्षित और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया, जबकि तीसरा सम्मेलन 10-11 फरवरी 2025 को फ्रांस के पेरिस में हुआ. इसमें एआई को सार्वजनिक हित और टिकाऊ विकास से जोड़ने के मामले पर मंथन किया गया था. इस तरह का चौथा सम्मेलन अब भारत में हो रहा है. सोमवार को सम्मेलन की जानकारी देते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर व्यापक कानून का होना जरूरी है. फर्जी खबर, फर्जी जानकारी रोकने के लिए भारत 30 देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है.
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